सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरिडोर का निर्माण कार्य बारिश के बाद तेज गति से शुरू किया जाएगा। इस परियोजना को मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा संचालित किया जा रहा है। यह परियोजना क्षेत्र के विकास और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोरलेन की शुरुआत
इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोरलेन का निर्माण इंदौर के पितृ पर्वत क्षेत्र से होकर उज्जैन के चिंतामन गणेश मंदिर के पास सिंहस्थ बायपास तक होगा। इस कॉरिडोर की लंबाई 48 किलोमीटर होगी, जो इंदौर और उज्जैन के बीच यात्रा समय को घटाकर 30-35 मिनट तक कर देगा। यह समय की बचत यात्रियों को अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों में भी मदद करेगी।
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कॉरिडोर के मार्ग में कई प्रमुख स्थल शामिल होंगे, जो यात्रियों को सुगम और सीधी यात्रा का अनुभव देंगे। इससे व्यापारियों और स्थानीय निवासियों के लिए आवागमन की सुविधा में भी सुधार होगा।

परियोजना की लागत और भूमि अधिग्रहण
इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹2,935 करोड़ है। परियोजना के लिए इंदौर और उज्जैन जिलों के 28 गांवों के 917 किसानों की लगभग 243 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है। इसके लिए ₹816 करोड़ से अधिक का मुआवजा वितरण किया गया है। किसानों को उनके भूमि के उचित मूल्य का भुगतान किया गया है ताकि वे अपने भविष्य के लिए अन्य विकल्प तलाश सकें।
भूमि अधिग्रहण के दौरान प्रशासन ने किसानों के साथ संवाद स्थापित कर उनके हितों का ध्यान रखा। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि कोई भी अनावश्यक विवाद उत्पन्न न हो।
बारिश के कारण निर्माण में देरी
वर्षाकाल के दौरान निर्माण कार्य में देरी हुई है। इसके अलावा, कुछ किसानों द्वारा अधिग्रहित जमीनों पर फसल बो दिए जाने के कारण भी कार्य धीमा पड़ा। बारिश के बाद निर्माण कार्य को तेज गति से आगे बढ़ाने की योजना है। मौसम साफ होने के साथ ही निर्माण कार्य को प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि भविष्य में मौसम से संबंधित कोई अन्य बाधा न आए, इसके लिए वैकल्पिक योजनाएं तैयार की गई हैं।
डिजाइन में बदलाव
किसानों के विरोध और जलभराव की समस्या से बचने के लिए ग्रीनफील्ड फोरलेन के डिजाइन में बदलाव किया गया है। इसे अब एलिवेटेड मॉडल के बजाय सामान्य जमीनी स्तर पर बनाया जाएगा। यह बदलाव पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम करने के उद्देश्य से भी किया गया है।
नई डिजाइन से निर्माण की लागत में भी कमी आने की संभावना है, जिससे परियोजना को समय पर पूरा करना संभव होगा।
प्रस्तावित लाभ
इस परियोजना के पूरा होने पर इंदौर और उज्जैन के बीच यातायात में सुधार होगा। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों को बेहतर आवागमन की सुविधा प्राप्त होगी। स्थानीय व्यापार को भी प्रोत्साहन मिलेगा, क्योंकि यातायात की सुगमता से व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
यह सड़क न केवल समय बचाएगी बल्कि ईंधन की खपत को भी कम करेगी, जिसका पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव होगा।
आगे की योजना
प्रशासन ने निर्माण कार्य को सुगम बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। सिंहस्थ 2028 से पहले इस कॉरिडोर को जनता को समर्पित करने का लक्ष्य है। यह परियोजना राज्य के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
भविष्य में इस तरह की और परियोजनाओं की योजना भी बनाई जा रही है ताकि क्षेत्र का समग्र विकास हो सके।



