नई दिल्ली। देश में चीनी की बढ़ती कीमतों और घटते स्टॉक को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले चीनी के दाम बढ़ने का मुद्दा उठाते हुए खड़गे ने सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए और पूछा कि जब भारत दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक देशों में शामिल है, तो देश को चीनी आयात करने की नौबत क्यों आई।
तीन महीने में 40 फीसदी बढ़े दाम
खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि पिछले तीन महीनों में चीनी की कीमत करीब 40 फीसदी बढ़ गई है। उन्होंने इस बढ़ोतरी को त्योहारों से पहले आम उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले महंगाई के अतिरिक्त बोझ से जोड़ते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा। कांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक, चीनी की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब देश में त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है। इस दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में कीमतों में तेजी का सीधा असर आम परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ सकता है।
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नौ साल के निचले स्तर पर पहुंचा चीनी का स्टॉक
खड़गे ने दावा किया कि भारत में चीनी का स्टॉक नौ साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल भारत में आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी कि घरेलू बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार को चीनी के निर्यात पर रोक लगानी पड़ी और आयात का सहारा लेना पड़ा। कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार को 10 लाख टन चीनी शुल्क-मुक्त आयात करने की जरूरत क्यों पड़ी। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार ने घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने के उद्देश्य से 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है।
एथेनॉल नीति पर भी खड़गे ने उठाए सवाल
खड़गे के हमले का एक अहम हिस्सा सरकार की एथनॉल नीति रहा। उन्होंने सवाल किया कि जब देश में चीनी की उपलब्धता कम हो रही है और सरकार को विदेश से चीनी मंगानी पड़ रही है, तब गन्ने और अनाज को एथनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने वाली नीति की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है। उनका इशारा पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण की नीति, खास तौर पर E20 की ओर था। खड़गे का तर्क है कि यदि चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध गन्ने का एक हिस्सा एथनॉल बनाने में इस्तेमाल हो रहा है, तो इससे घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने इसी संदर्भ में सरकार से सवाल किया—ये कैसा आत्मनिर्भर भारत है?
कांग्रेस ने गन्ने और एथेनॉल को जोड़ा
कांग्रेस की ओर से यह भी दावा किया गया है कि करीब 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना एथेनॉल उत्पादन में चला गया, जिसके कारण चीनी और गुड़ की कीमतों पर असर पड़ा। कांग्रेस के अनुसार, इसी अवधि में चीनी की कीमत लगभग 48 रुपये से बढ़कर 67 रुपये प्रति किलोग्राम और गुड़ की कीमत करीब 50 रुपये से बढ़कर 65 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। हालांकि, सरकार इस दावे से सहमत नहीं है कि चीनी की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण एथनॉल के लिए डायवर्जन है। सरकार की ओर से कहा गया है कि इस साल चीनी उत्पादन में अनुमानित गिरावट का बड़ा कारण कमजोर मानसून और गन्ने के उत्पादन में कमी है। सरकार ने यह भी कहा है कि घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए चीनी के निर्यात पर रोक जैसे कदम उठाए गए हैं।



