इंदौर। नगर निगम के कामकाज के लिए चुने हुए पार्षदों की एक महापोर परिषद होती है। अभी भी है। जो बीच-बीच में बैठक कर शहर हित के कामों को मंजूरी देती है। इसमें हर विभाग के प्रभारी होते हैं। नगर निगम में जितने भी महापौर हुए, उनके कार्यकाल में ऐसी महापौर परिषद होती रही है। लेकिन, इस बार नगर निगम के विधान से अलग एक अलग महापौर परिषद भी है, जो महापौर के सारे काम निपटाती है।
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असली एमआईसी पर भारी
भाजपा से लेकर नगर निगम तक में इस बात की चर्चा है कि महापौर वाली महापौर परिषद ओरिजनल एमआईसी पर भारी पड़ती दिखाई देती है। भाजपा नेताओं, पार्षदों और महापौर परिषद के सदस्यों ने जो जानकारी दी है, उसके हिसाब से हम महापौर वाली महापौर परिषद के सदस्यों के नाम यहां प्रकाशित कर रहे हैं। हालांकि पार्षदों और भाजपा नेताओं ने इन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन हम उनकी पुष्टि नहीं कर सकते। भाजपा नेता तो यह भी सवाल उठा रहे हैं कि जब इन सब कामों के लिए महापौर परिषद है, तो इन लोगों की जरूरत क्यों?
ये रही महापौर की अपनी परिषद
विवेक सिन्हा– महापौर के विधानसभा 5 के प्रतिनिधि हैं। धार के रहने वाले हैं और इंदौर में मेयर बंगले पर कब्जा है। निगम अफसरों पर इनकी जमकर दादागिरी चलती है। हाल ही में विधायक महेन्द्र हार्डिया का महापौर से जो विवाद हुआ था, उसकी जड़ में यही बताए जाते हैं।
भारत पारीख-महापौर के खासमखास प्रतिनिधि हैं। भाजपा के सूत्र कहते हैं कि एआईसीटीएसएल से लेकर नगर निगम में इनकी जबरदस्त पकड़ है। इनकी बिना सहमति के कोई टेंडर पास नहीं होता। रोड साइड सोलर चार्जिंग से लेकर एआईसीटी एसएल में नई बस खऱीदी भी इनके बगैर नहीं हो सकती। अब इसमें इन्हें या महापौर को क्या फायदा होता होगा, आप खुद ही समझदार हो।
पारस सोनगरा-भाजपा और नगर निगम के लोग इन्हें टैंकर माफिया कहते हैं। हम तो ऐसा नहीं मानते, लेकिन लोग कह रहे हैं कि इनकी सहमति से कई टैंकर सिर्फ कागजों पर ही दौड़ रहे हैं। कुछ लोग तो यह भी कह रहे हैं कि ऐसे कामों में प्रति टैंकर हर माह 55 हजार का फायदा भी होता है।
आयुष रावल-महापौर की महापौर परिषद के इस सदस्य की महिमा भी अपरंपार बताई जाती है। नगर निगम और भाजपा वाले ही आरोप लगा रहे हैं कि टेंडर से लेकर पेमेंट तक इनके वगैर नहीं हो सकता। कुछ लोग तो यह भी कह रहे हैं कि बेचारे को महापौर के ऊपरी खर्च भी उठाने पड़ते हैं। ऐसे में इवेंट और होटल आदि के कुछ फर्जी बिल लगा भी दिए तो क्या हुआ।
नितीन पांडे– निशांत मोदी/अंकेश/ओम सोलंकी/ राजेंद्र उर्फ़ पम्पी शर्मा के साथ फर्म बनाकर विभिन्न वार्डो के टेंडर उठाना/ फर्जी बिल ओर नकली फ़ाइल से पैसा पास कराना इसमें आयुष रावल निगम अफसरों से तालमेल बैठता है.. नितीन पांडे का फर्जी बिल मामले में बीजेपी पार्षद से विवाद भी हो चूका है…नगर निगम की सोलर योजना में भी इनकी भागीदारी है..
नयन दुबे – पार्थ इंटरप्राइजेस सहित अन्य नामों से निगम में पोकलेन/ जेसीबी मशीन आदि अटैच करवाने की बात इनके बारे में कही जा रही है। भाजपा वाले कह रहे हैं कि ये साहब फर्जी बिल पास कराने में भी मास्टर हैं।
विशाल उर्फ़ सोनू बुंदेला– द्रविड़ नगर / हवा बंगला /बिलावली जोन का प्रभारी बताया जाता है। फर्जी बिल की फ़ाइल लगाने में यह भी मास्टर बताए जाते हैं। सूत्र बताते हैं कि इंदौर पीथमपुर के बीच सिर्फ दो बसें चलती थी, जिसे बढ़ाकर 10 के आसपास कर ली है। एआईसीटीएसएल में भी बस अटैच है।
अनीश ठक्कर-सूत्र इन्हें निगम की ठेकेदारी और इवेंट के माध्यम से फर्जीवाड़ा करने में उस्ताद बताते हैं।
पंकज खरत- इनके बारे में कहा जाता है कि दशहरा मैदान पर फुटबाल स्पोर्ट्स एकेडमी के नाम पर इनका कब्जा है। सूत्र बताते हैं कि ये खंडवा में हुए कुछ अपराधों में इनका भी हाथ है। ये अभी महापौर के साथ निगम के टेंडर उठाकर विकसित बगीचों को तोड़कर फिर से बना रहे है।
ऋषब बगोरा-ट्रेफिक मित्र इंचार्ज हैं। ये भी महापौर की महापौर परिषद के सदस्य हैं, जो नगर निगम से लगभग 14 लाख रुपए प्रतिमाह का भुगतान प्राप्त कर रहे हैं।
नोट-यहां दी गई पूरी जानकारी भाजपा नेताओं, महापौर परिषद के सदस्यों और भरोसेमंद सूत्रों के आधार पर है।



