सीएम योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में राहुल गांधी की ‘मनुस्मृति की मानसिकता’ पर की गई टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई है। यह टिप्पणी राहुल गांधी ने पुणे में एक छात्र संवाद कार्यक्रम के दौरान की थी। इस बयान ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल मचाई, बल्कि आम जनता के बीच भी चर्चा का विषय बन गया।
राहुल गांधी की ‘मनुस्मृति की मानसिकता’ पर टिप्पणी
राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान विवादास्पद बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश को ‘मनुस्मृति की मानसिकता’ से बाहर निकलने की आवश्यकता है। राहुल के इस बयान का उद्देश्य समाज में व्याप्त असमानता और जातिवाद पर प्रहार करना था। हालांकि, यह बयान कई राजनीतिक दलों के लिए आपत्तिजनक बन गया। उन्होंने भारतीय समाज की प्राचीन मान्यताओं पर सवाल उठाए, जिससे विभिन्न विचारधाराओं के बीच बहस छिड़ गई।
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इस बयान ने न केवल राजनीतिक नेताओं को प्रतिक्रिया देने के लिए प्रेरित किया, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों में भी इसकी गूंज सुनाई दी। कई लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति पर हमला माना, जबकि कुछ ने इसे सामाजिक सुधार की दिशा में एक विचारशील कदम बताया।
योगी आदित्यनाथ का तीखा पलटवार
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रायबरेली में राहुल गांधी के बयान पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान देश की परंपराओं और विरासत का अपमान हैं। योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी पर भारतीय संस्कृति और इतिहास की गलत व्याख्या करने का आरोप लगाया। उनका मानना है कि इस प्रकार के बयान न केवल समाज में भ्रम फैलाते हैं, बल्कि युवाओं को गलत दिशा में प्रेरित कर सकते हैं।
योगी आदित्यनाथ का कहना है कि भारतीय संस्कृति का आदर और सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो नेता सार्वजनिक मंचों पर बात करते हैं, उन्हें जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखनी चाहिए।
संवैधानिक पद और दायित्व पर जोर
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष के रूप में संविधान की शपथ लेकर लोकतंत्र के प्रति जवाबदेह हैं। लेकिन वे अक्सर देश की परंपराओं को कोसते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे बयानों से जनता में गलत संदेश जाता है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में हर नेता को अपने दायित्वों का समझ होना चाहिए।
योगी आदित्यनाथ ने यह भी रेखांकित किया कि विपक्ष के नेता होने के नाते, राहुल गांधी का कर्तव्य है कि वे सकारात्मक आलोचना करें और देश के विकास में योगदान दें।
मनु और वैदिक ग्रंथों का अध्ययन
सीएम योगी ने कहा कि यदि राहुल गांधी को ‘मनु’ को समझना है, तो उन्हें अथर्ववेद, शतपथ ब्राह्मण और मत्स्य पुराण का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने मनु की काल-गणना को भारत की देन बताया। योगी आदित्यनाथ ने यह तर्क दिया कि प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन करने से भारतीय संस्कृति की गहराई और जटिलता का सही आकलन किया जा सकता है।
उनके अनुसार, इन ग्रंथों का अध्ययन न केवल भारतीय इतिहास को समझने में सहायक होगा, बल्कि यह भी बताएगा कि भारतीय समाज ने कैसे समय के साथ अपने आप को ढाला है।
उत्तर प्रदेश और भारत का अपमान
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी जब भी विदेश जाते हैं, तो भारत की छवि को अपमानित करते हैं। उन्होंने कहा कि यह उत्तर प्रदेश और देश का अपमान है। योगी आदित्यनाथ ने इस बात पर जोर दिया कि विदेशी धरती पर देश के खिलाफ बोलना राष्ट्रीय गौरव को ठेस पहुंचाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे बयान वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने सभी नेताओं से देश की छवि को बनाए रखने की अपील की।
सेना और आतंकवाद पर विवाद
सीएम योगी ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे सेना के जवानों से प्रमाण मांगते हैं और आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान देशविरोधी तत्वों को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि सेना पर ऐसे सवाल उठाना उचित नहीं है।
योगी आदित्यनाथ ने सेना के योगदान और बलिदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि सेना की आलोचना करना, उनके मनोबल को प्रभावित कर सकता है।
आपातकाल और अयोध्या का उल्लेख
योगी आदित्यनाथ ने 1975 में कांग्रेस द्वारा लगाए गए आपातकाल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अयोध्या में प्रभु श्री राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए थे। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं, जब संवैधानिक मूल्यों को दरकिनार किया गया।
उन्होंने कहा कि अयोध्या विवाद भारतीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इसे बार-बार उठाने से समाज में विभाजन की स्थिति उत्पन्न होती है।
संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री पद देश की एक प्रमुख संस्था है। उस पर अनुचित टिप्पणी करना संवैधानिक संस्थाओं का अनादर है। उन्होंने सभी से संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करने का आह्वान किया।
योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि संविधान के प्रति सम्मान सभी नागरिकों का कर्तव्य है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अनुरोध किया कि वे संवैधानिक मूल्यों का पालन करें।
इस विवाद से राजनीतिक माहौल में हलचल है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाएगा। इस विवाद ने न केवल राजनीतिक गलियारों में बहस छेड़ दी है, बल्कि इसे लेकर जनता में भी चर्चा का माहौल है।



