आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ले जिले से मंगलवार सुबह एक दर्दनाक औद्योगिक हादसे की खबर सामने आई है। जिले के अच्युतापुरम क्षेत्र स्थित दक्षिण एनर्जी यूनिट में अचानक भीषण आग लग गई, जिसने देखते ही देखते पूरे प्लांट को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में दो कर्मचारियों की जलकर मौत हो गई, जबकि दो अन्य कर्मचारियों के अब भी प्लांट के अंदर फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।
आग लगते ही मची अफरा-तफरी
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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह अचानक यूनिट से धुआं और आग की ऊंची लपटें उठने लगीं। आग लगते ही कर्मचारियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। कई कर्मचारी समय रहते बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन कुछ लोग अंदर ही फंस गए।
हादसे में जान गंवाने वाले कर्मचारियों की पहचान त्रिनाथ और वेंकटेश के रूप में हुई है। दोनों अनाकापल्ले जिले के अच्युतापुरम क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं।
प्लास्टिक सामग्री ने आग को बनाया और खतरनाक
जानकारी के अनुसार दक्षिण एनर्जी यूनिट में प्लास्टिक पायरोलिसिस ऑयल और कार्बन ब्लैक का उत्पादन किया जाता है। प्लांट में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक और ज्वलनशील सामग्री मौजूद होने के कारण आग ने बेहद तेजी से विकराल रूप धारण कर लिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ ही मिनटों में आग पूरे परिसर में फैल गई, जिससे बचाव कार्य भी चुनौतीपूर्ण हो गया।
अभी तक नहीं पता चला आग का कारण
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर आग लगी कैसे? फिलहाल आग लगने के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है। पुलिस और प्रशासन का कहना है कि पहले आग पर पूरी तरह काबू पाया जाएगा, उसके बाद विशेषज्ञों की टीम घटनास्थल का निरीक्षण कर दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच करेगी।
राहत और बचाव अभियान जारी
दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंची हुई हैं और आग बुझाने का अभियान लगातार जारी है। पुलिस प्रशासन ने पूरे इलाके को घेर लिया है ताकि किसी भी तरह की दूसरी दुर्घटना को रोका जा सके।
एक अधिकारी के अनुसार आग पर काबू पाने के बाद विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम सुरक्षा मानकों, मशीनरी और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच करेगी।
लगातार बढ़ रहे इंडस्ट्रियल हादसों ने बढ़ाई चिंता
पिछले कुछ महीनों में विशाखापत्तनम और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में कई दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में यह ताजा हादसा एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रासायनिक और प्लास्टिक आधारित उद्योगों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन न होने पर ऐसे हादसे बड़े नुकसान का कारण बन सकते हैं।
क्या फिर सामने आएगी लापरवाही?
अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है। क्या यह हादसा तकनीकी खराबी की वजह से हुआ या फिर सुरक्षा मानकों में लापरवाही के कारण? और सबसे अहम सवाल, क्या ऐसे हादसों को रोकने के लिए उद्योगों में सुरक्षा नियमों को और सख्त बनाए जाने की जरूरत है?



