भारतीय राजनीति में 10 जून का दिन इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसे दशकों तक अटूट माना जाता था। लगातार तीसरी बार देश की सत्ता संभाल रहे नरेंद्र मोदी ने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ते हुए देश के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने का गौरव हासिल कर लिया है।
26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले नरेंद्र मोदी ने अब अपने निर्वाचित प्रधानमंत्री कार्यकाल के 4399 दिन पूरे कर लिए हैं। इसी के साथ उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के 4398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि केवल एक राजनीतिक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।
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कैसे टूटा नेहरू का दशकों पुराना रिकॉर्ड?
आजादी के बाद 15 अगस्त 1947 को जवाहरलाल नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने थे। हालांकि उस समय उन्हें नियुक्त प्रधानमंत्री के रूप में जिम्मेदारी मिली थी। भारत में पहला आम चुनाव 1952 में हुआ, जिसके बाद कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला और नेहरू निर्वाचित प्रधानमंत्री बने। 13 मई 1952 से लेकर 27 मई 1964 तक वे लगातार प्रधानमंत्री पद पर रहे और इसी अवधि के आधार पर उनके नाम सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड दर्ज हुआ।
करीब सात दशकों तक यह रिकॉर्ड भारतीय राजनीति में अटूट माना जाता रहा। लेकिन 2024 में लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने वाले नरेंद्र मोदी ने अब उस ऐतिहासिक उपलब्धि को पीछे छोड़ दिया है।
तीसरे कार्यकाल में बना नया इतिहास
प्रधानमंत्री मोदी का यह लगातार तीसरा कार्यकाल है, जो अपने आप में भारतीय राजनीति की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। आजादी के बाद बहुत कम नेताओं को लगातार तीन बार देश की जनता से इतना बड़ा जनादेश प्राप्त हुआ है। यही कारण है कि मोदी का यह रिकॉर्ड राजनीतिक विश्लेषकों, इतिहासकारों और समर्थकों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले एक दशक में केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई विभिन्न योजनाएं, बुनियादी ढांचे का विस्तार, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, जी-20 नेतृत्व और वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका ने मोदी की लोकप्रियता को मजबूत किया है।

रिकॉर्ड बनाने के बाद पीएम मोदी का पहला संदेश
इतिहास रचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर देशवासियों के नाम संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि जनसेवा ही सुशासन की सबसे बड़ी कसौटी है और जनता का विश्वास केवल विनम्रता, समर्पण तथा कर्तव्यनिष्ठा से ही अर्जित किया जा सकता है।
अपने संदेश में उन्होंने एक संस्कृत श्लोक भी साझा किया—
“सदानुरक्तप्रकृतिः प्रजापालनतत्परः।
विनीतात्मा हि नृपतिर्भूयसी श्रियमश्नुते॥”
इस श्लोक का भावार्थ है कि जो शासक अपनी प्रजा के प्रति समर्पित रहता है, विनम्रता के साथ शासन करता है और जनता के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है, वही स्थायी सफलता और सम्मान प्राप्त करता है।
क्या यह रिकॉर्ड और आगे बढ़ेगा?
अब राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नरेंद्र मोदी आने वाले वर्षों में इस रिकॉर्ड को और भी आगे ले जाएंगे? यदि उनका वर्तमान कार्यकाल पूरा होता है, तो वे भारतीय राजनीति में कई अन्य ऐतिहासिक उपलब्धियों को भी अपने नाम कर सकते हैं।
फिलहाल इतना तय है कि 10 जून 2026 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में उस दिन के रूप में याद किया जाएगा, जब नरेंद्र मोदी ने नेहरू के दशकों पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए भारतीय राजनीति में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया और इतिहास की दिशा बदल दी।



