अमेरिका में काम करने का सपना देख रहे लाखों विदेशी पेशेवरों, खासकर भारतीयों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। एक अमेरिकी फेडरल जज ने ट्रंप प्रशासन की उस विवादित नीति को रद्द कर दिया है, जिसके तहत नए H-1B वीजा आवेदनों पर 1 लाख डॉलर की अतिरिक्त फीस लगाई गई थी।
मैसाचुसेट्स के जिला जज लियो सोरोकिन ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कांग्रेस की मंजूरी के बिना इतनी बड़ी फीस लगाना प्रशासनिक अधिकारों का दुरुपयोग है।
👉 यह भी पढ़ें:
- H-1B Visa पर बड़ा संकट! क्या अमेरिका में भारतीयों का ‘American Dream’ टूटने वाला है? ग्रीन कार्ड और नौकरी के रास्ते पर मंडराया खतरा
- H-1B वीजा पर $1 लाख फीस का विरोध: ट्रंप प्रशासन के खिलाफ 20 अमेरिकी राज्यों की कोर्ट में चुनौती
- वॉशिंगटन डीसी हमले के बाद ट्रंप प्रशासन में कड़ाई: 19 देशों के ग्रीन कार्ड धारकों की सघन जांच का आदेश
- ट्रंप प्रशासन का बड़ा बयान: “एच-1बी पर नीति सख़्त, लेकिन विदेशी निवेश जरूरी” — व्हाइट हाउस
गौरतलब है कि H-1B वीजा अमेरिका की टेक और प्रोफेशनल इंडस्ट्री का सबसे महत्वपूर्ण वर्क वीजा माना जाता है। USCIS के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में जारी H-1B वीजा का 71 प्रतिशत हिस्सा भारतीय पेशेवरों को मिला था।
ट्रंप प्रशासन ने इस फैसले को “न्यायिक सक्रियता” बताते हुए विरोध किया है, लेकिन फिलहाल यह निर्णय भारतीय आईटी सेक्टर और अमेरिका में नौकरी तलाश रहे युवाओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।


