अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त होते ही वैश्विक तेल बाजार में हलचल मच गई है। आशंकाओं के अनुरूप, बातचीत विफल होने के अगले ही दिन कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला।
अमेरिका द्वारा ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी की घोषणा के बाद बाजार में भारी प्रतिक्रिया आई। शुरुआती कारोबार में अमेरिकी कच्चा तेल लगभग आठ प्रतिशत बढ़कर 104.24 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत सात प्रतिशत उछलकर 102.29 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
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यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में पहले से ही भारी उतार-चढ़ाव बना हुआ है। फरवरी के अंत में युद्ध शुरू होने से पहले ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो कई बार 119 डॉलर प्रति बैरल के पार भी पहुंच गई। शांति वार्ता से पहले इसमें थोड़ी गिरावट आई थी, लेकिन अब फिर तेजी लौट आई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम केंद्र बना हुआ है, जहां से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल हर दिन गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और ईरान जैसे प्रमुख तेल निर्यातक देश इसी मार्ग पर निर्भर हैं।
तेल की कीमतों में यह उछाल वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। इससे महंगाई बढ़ने और कई देशों की आर्थिक विकास दर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। खासकर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति सीधे असर डालने वाली साबित हो सकती है।



