‘कमल’ खिलाने के लिए पूरी पार्टी को ‘कीचड़’ तो नहीं बना रही भाजपा

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अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के समय पार्टी विथ डिफरेंस के लिए जानी जाने वाली भाजपा में अब काफी मिलावट हो गई है। कोई जरूरी नहीं कि आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि संघ या जनसंघ से जुड़ी हो, कोई जरूरत नहीं कि आप भाजपा के सिद्धांतों को मानते हों, अगर आप किसी राज्य में सत्तारुढ़ पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं तो आपका भाजपा में स्वागत है।

सबको याद होगा, जब मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने भाजपा से सत्ता छीन ली थी, तो पार्टी कैसे बिलबिला गई थी। फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया को मोहरा बनाकर मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार पलट दी गई थी। उस समय काफी संख्या में कांग्रेस के विधायक और मंत्री भाजपा में शामिल हो गए थे। इनमें से कई आज भी मंत्री हैं और इस मिलावट के कारण भाजपा के कई नेता किनारे कर दिए गए।

इसके बाद महाराष्ट्र में भी यही हुआ। ताजा उदाहरण बिहार का है, जहां नीतीश कुमार को राज्यसभा में भेजकर भाजपा ने अपना सीएम बना दिया। देश के अन्य राज्यों में भी यही हाल रहा। ऐन-केन-प्रकारेण सत्ता हासिल करना भाजपा के आज के कर्णधारों का मूल सिद्धांत बन गया। पं.दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं के सिद्धांत सिर्फ भाषणों में सिमट कर रह गया।

शुक्रवार को पंजाब में जो कुछ भी हुआ, वह भाजपा के वर्तमान नेतृत्व के खतरनाक इरादे को दर्शाता है। हालांकि यह तो पहले से ही पता था कि भाजपा, आप के राज्यसभा सांसद राघव चड्‌ढा पर काफी समय से डोरे डाल रही थी, लेकिन वे अपने साथ छह और सांसद ले आएंगे इसकी कल्पना अरविंद केजरीवाल को भी नहीं थी। इसका साफ मकसद है दिल्ली के बाद पंजाब में भी आपकी रीढ़ तोड़ देना। भले ही अभी पंजाब में सत्ता परिवर्तन न हो पाए, लेकिन विधानसभा चुनाव तक आप को इतना कमजोर कर देना, जिससे भाजपा का रास्ता साफ हो जाए।

ताज्जुब तो इस बात का है कि पंजाब से जिन सांसदों को तोड़ा गया है, उनमें वह अशोक मित्तल भी शामिल हैं, जिनके यहां हाल ही में ईडी ने छापा मारा था। अब इसके मायने तो भाजपा आलाकमान ही बता सकती है, लेकिन इन कवायदों का असर भाजपा के ओरिजनल कैडर पर पड़ हा है। भाजपा में पसीना बहा-बहा कर अपने बाल सफेद कर चुके नेताओं को यह चिन्ता होने लगी है कि अब उनका क्या होगा?

पार्टी के नेता ही कह रहे हैं कि कहीं कमल खिलाने के चक्कर में पूरी भाजपा ही कीचड़ न बन जाए…

Harish Fatehchandani
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Harish Fatehchandani is a dedicated journalist with over a decade of experience in the media field. He is respected for his consistent and honest reporting.

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