डायमंड कॉलोनी विवाद से भूमाफियाओं का नया खेल उजागर, पुलिस कमिश्नर के एक्शन से जगी उम्मीद, अब जड़ तक जाना जरूरी

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इंदौर। डायमंड कॉलोनी में हुए विवाद ने भूमाफियाओं के नए खेल को उजागर कर दिया है। भूमाफियाओं ने पुलिसकर्मियों को पीट दिया और इसके बाद भी पुलिस चुप रही। मामला उजागर होने के बाद पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने संज्ञान लेकर केस दर्ज करवाया, नहीं तो यह अब तक रफा-दफा हो चुका था। पुलिस ने न केवल पुलिसकर्मियों को पीटने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया, बल्कि कुछ बड़े कॉलोनाइजर और भूमाफिया उसकी रडार पर हैं।

प्रतीक संघवी को पूछताछ के लिए बुलाया

इस मामले में पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह की सख्ती के बाद न केवल चार लोगों को गिरफ्तार किया गया, बल्कि कई भूमाफिया उनकी रडार पर हैं। बताया जाता है कि इसी मामले में पूछताछ के लिए कॉलोनाइजर प्रतीक संघवी को कनाड़िया थाने बुलाया गया। कई और कॉलोनाइजर और भूमाफिया पुलिस की रडार पर हैं।

आखिर क्यों नहीं पेश होते चालान

डायमंड कॉलोनी मामले के उजागर होने के बाद पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने एमआईजी थाने में दर्ज कुछ केस में चालान पेश होने के आदेश दिए। एमआईजी ही नहीं, शहर के विभिन्न थानों में भूमाफियाओं के खिलाफ सैकड़ों केस दर्ज हैं, लेकिन उनमें चालान पेश नहीं होता। अब पुलिस कमिश्नर की सख्ती को देखते हुए ऐसा लगता है कि सारी फाइलें फिर से खुलने वाली हैं।

एक एसीपी ने तो ले रखी थी सुपारी

पुलिस के ही सूत्र बताते हैं कि एक एसीपी ने तो एमआईजी थान में दर्ज मामलों के खात्मे की सुपारी ले रखी थी। अब उनका ट्रांसफर हो चुका है। ऐसे ही कई थानों के मामले हैं, जिनमें भूमाफिया पुलिस से मिलीभगतकर मामले को आगे नहीं बढ़ने दे रहे। ऐसे सभी मामलों में अब सख्ती दिखानी होगी।

कनाड़िया टीआई की संदिग्ध भूमिका

इस पूरे मामले में कनाड़िया टीआई की भूमिका काफी संदिग्ध रही है। पुलिस पिटाई का मामला सामने आने के बाद भी वे समझौता कराने की कोशिश में जुटे रहे। पिटाई में घायल पुलिसकर्मियों को सामने आने नहीं दिया और मीडिया से कहते रहे कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों को सबसे पहले कनाड़िया टीआई पर कार्रवाई करनी चाहिए और उनसे यह उगलवाना चाहिए कि आखिर किसके दवाब में वे इस घटना को छुपा रहे थे। ऐसा न हो कनाड़िया टीआई पर भी चंदन नगर टीआई जैसा सुप्रीम कोर्ट में मामला न पहुंच जाए।

प्रशासन के बाद पुलिस बनी मोहरा

उल्लेखनीय है कि पहले भूमाफिया प्रशासन और विभिन्न सरकारी विभागों के माध्यम से काम करते थे। जब भूमाफियाओं के खिलाफ अभियान चला और प्रशासन ने एफआईआर दर्ज कर इन्हें जेल भेजना शुरू किया तो वे सचेत हो गए। इसके बाद उन्होंने पुलिस को अपना शिकार बनाना शुरू किया।

पुलिस को राजस्व की समझ नहीं

प्रशासन से मिलीभगत कर कार्रवाई में भूमाफियाओं को परेशानी होती थी। इसका कारण यह था कि प्रशासन में कलेक्टर से लेकर पटवारी तक को राजस्व की समझ होती थी और मामला पकड़ में आने लगता था। इसीलिए भूमाफियाओं ने पुलिस को टारगेट किया। राजस्व या भूमि कानूनों की जानकारी नहीं होने के कारण थोड़े से लालच में पुलिस वाले भूमाफियों के चंगुल में फंसते रहे।

लंबे समय से चल रहा है खेल

भूमाफियाओं द्वारा पुलिस के माध्यम से लंबे समय से यह खेल चल रहा है। ऐसे कई मामले खजराना और कनाड़िया थाने में उजागर भी हुए हैं। अगर इस बार वरिष्ठ अधिकारी सचेत नहीं होते तो इस मामले में भी शायद ही कुछ होता।

मामले की तह तक जाकर हो सख्त एक्शन

यह मामला उजागर होने के बाद अब पुलिस और प्रशासन को मामले की तह तक जाकर सख्त से सख्त एक्शन लेना चाहिए। आखिर वह कौन लोग हैं, जो भूमाफियाओं के इशारे पर पुलिस की आंखों में धूल झोंककर इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। इसमें यशंवत जैसे कई लाइजनर के नाम सामने आ रहे हैं।

जेल से छूटा भूमाफिया है सक्रिय

ऐसे कारनामों में जेल से छूटे एक भूमाफिया की सक्रियता भी नजर आ रही है। वह न सिर्फ अपने खिलाफ दर्ज प्रकरणों को निपटाने में लगा है, बल्कि दूसरे लोगों के मामले सुलझाने की सुपारी भी ले रहा है। ताज्जुब की बात यह कि उसे नेताओं और अधिकारियों का साथ भी मिल जाता है। पुलिस को चाहिए कि इस मामले की पूरी पड़ताल कर इससे जुड़े सभी लोगों पर सख्त एक्शन ले।

Harish Fatehchandani
Harish Fatehchandanihttp://www.hbtvnews.com
Harish Fatehchandani is a dedicated journalist with over a decade of experience in the media field. He is respected for his consistent and honest reporting.

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