Indus Water Treaty: सिंधु जल संधि पर भारत के सख्त रुख से पाकिस्तान में बढ़ी बेचैनी, पाक मंत्री की ‘हाथ काट देंगे’ वाली धमकी चर्चा में

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सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को भारत द्वारा स्थगित किए जाने के बाद पाकिस्तान में पानी के मुद्दे पर बयानबाजी तेज हो गई है। इस बीच पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है।

पाक मंत्री की धमकी, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान कहा कि “जो भी हमारे पानी को छुएगा, उसके हाथ काट दिए जाएंगे।” 

सूचना मंत्री ने भी भारत पर साधा निशाना

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने भी भारत का नाम लिए बिना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। एक पाकिस्तानी अखबार के अनुसार, उन्होंने कहा कि “एक पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री के हाथ में पानी का नल है और वे कहते हैं कि पाकिस्तान में पानी की एक बूंद भी नहीं जाने देंगे।”

तरार ने यह भी दावा किया कि सिंधु जल संधि को कोई भी देश एकतरफा तरीके से समाप्त या रद्द नहीं कर सकता।

भारत का रुख- ‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते’

भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपने सख्त रुख को दोहराते हुए पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि “आतंक और बातचीत साथ नहीं हो सकते, और खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।”

भारत का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और आतंकवाद को समर्थन देने वाले ढांचे के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का भी सख्त संदेश

हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी स्पष्ट किया कि भारत अपने फैसले से पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित कर भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जिनके आंसू सूख चुके हैं, वे भारत से पानी की उम्मीद न रखें।

बढ़ सकता है कूटनीतिक तनाव

सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में भारत-पाकिस्तान संबंधों, जल सुरक्षा, क्षेत्रीय कूटनीति और सीमा पार आतंकवाद पर व्यापक असर डाल सकता है।

आपका क्या मानना है?
क्या आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का सिंधु जल संधि को लेकर अपनाया गया सख्त रुख सही है? या इस विवाद का समाधान केवल कूटनीतिक बातचीत से ही संभव है? अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें।

Abhilash Shukla (Editor)
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