पश्चिम बंगाल के हल्दिया स्थित पेट्रोकेमिकल संयंत्र में मंगलवार तड़के भीषण आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हादसे में कई लोगों के झुलसने की खबर है, जबकि दो महिलाओं की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्रशासन और दमकल विभाग की टीमें मौके पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं।
सुबह 4 बजे लगी आग, नेफ्था गैस पाइपलाइन से रिसाव की आशंका
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स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा सुबह करीब 4 बजे हल्दिया के चिरंजीपुर क्षेत्र स्थित पेट्रोकेमिकल संयंत्र में हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, नेफ्था गैस पाइपलाइन में रिसाव के बाद आग भड़क गई। पहले इलाके में काले धुएं का घना गुबार दिखाई दिया और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया।
कई लोग झुलसे, दो महिलाओं की हालत गंभीर
आग की चपेट में आने से कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए। सभी घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, झुलसे लोगों में दो महिलाएं भी शामिल हैं, जिनकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है।
9 दमकल गाड़ियां मौके पर, घंटों चला राहत अभियान
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की नौ गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि करीब डेढ़ घंटे बाद भी उस पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका। दमकल कर्मियों और प्रशासन की टीमें लगातार आग बुझाने और आसपास के इलाकों को सुरक्षित करने में जुटी रहीं।
घर और दुकानें भी आग की चपेट में
भीषण आग की वजह से संयंत्र के आसपास स्थित कई घर और दुकानें भी जलकर राख हो गईं। स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। एहतियात के तौर पर आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
रेल सेवा पर भी पड़ा असर
इस हादसे का असर हल्दिया-पानस्कुरा रेल मार्ग पर भी पड़ा है। सुरक्षा कारणों से इस रूट पर रेल सेवाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे और स्थानीय प्रशासन हालात सामान्य करने में जुटे हुए हैं।
हादसे के कारणों की जांच जारी
फिलहाल, पाइपलाइन में आग लगने की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। शुरुआती आशंका गैस रिसाव की है, लेकिन प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञों की टीम तकनीकी कारणों की जांच कर रही है और विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों, गैस पाइपलाइन मॉनिटरिंग और आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



