राम मंदिर चढ़ावा चोरी, क्या इन्हें माफ कर दोगे रामजी!

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अयोध्या के राम मंदिर के लिए लगभग 500 वर्षों तक संघर्ष चला। 1528 में बाबरी मस्जिद के निर्माण के बाद से ही हिंदू समाज ने इसे वापस पाने के लिए लड़ाइयां शुरू कीं। 1528 से लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक यानी 2019 तक इस मुद्दे पर सैकड़ों बार छोटे-बड़े संघर्ष और कानूनी लड़ाइयां हुईं।

इन सैकड़ों वर्षों के दौरान बाबरी मस्जिद विध्वंस 1992 और 1990 के दशक में कार सेवा के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में सैकड़ों कारसेवकों ने अपनी जान गवाई। 1855 के हनुमानगढ़ी विवाद और 1990 में यूपी के तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव द्वारा गोली चलवाने से सैकड़ों कारसेवक अपनी जान गंवा बैठे थे।

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भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने रथयात्रा निकाली, विश्व हिन्दू परिषद ने पूरे देश में आंदोलन किया। फिर लगभग हर घर से एक-एक कारसेवक अयोध्या पहुंचा था। इतना ही नहीं जब बाबरी ढांचा हट गया और राम मंदिर बनने की उम्मीद जगी तो भी हर घर से एक-एक ईंट पहुंची थी। इसका मतलब साफ है कि अयोध्या का राम मंदिर राष्ट्र आस्था का प्रतीक है।

यह वही राम मंदिर है, जिसके कारण कभी लोकसभा में दो सीटें हासिल करने वाली भाजपा, अब बहुमत से बार-बार सत्ता में आ रही है। कई राज्य जहां उसकी पहुंच नहीं थी, वहां भी जय श्रीराम के उद्घोष ने उसे सत्ता दिलाई है।

और विडंबना देखिए कि इसी सरकार के शासनकाल में रामलला के मंदिर से लोगों की आस्थाएं चोरी होने लगीं। पूरे देश के दूर-दराज के इलाके से लोग घंटों लाइन में लगने और सुरक्षा के सारे मापदंड पार करने के बाद रामलला तक पहुंच पाते हैं। इतनी सुरक्षा के बाद भी लोगों द्वारा आस्था के रूप में चढ़ाए गए चढ़ावे की चोरी हो जा रही है।

ताज्जुब तो अब भी हो रहा है कि हमेशा राम का नाम लेने वाली भाजपा के शिखर पदों पर बैठे लोगों को तनिक भी मलाल नहीं है। जब शिकायत मिली तो बिना एफआईआर एसआईटी गठित हुई। एसआईटी की जांच में जब चोरी का पता चला तो बिना पिता का नाम और बिना पते वाली एफआईआर दर्ज हुई।

विडंबन यह कि अब भी लीपापोती जारी है। ये जो जेल में आठ लोग बंद हैं, छोटे-छोटे कारिंदे हैं, बड़े वाले तो अब भी राम नाम के दुपट्‌टे के पीछे मुंह छुपाकर बैठे हैं।

भाजपा के कर्णधारों, राम के नाम पर वोट मांगने वालों, अगर थोड़ी भी शर्म बची हो तो खुलकर सामने आओ।

देश की आस्था के साथ खिलवाड़ तो कर चुके हो, अब लोगों के धैर्य की परीक्षा मत लो।

अरे, कम से कम राम के नाम का लिहाज तो कर लेते….

Harish Fatehchandani
Harish Fatehchandanihttp://www.hbtvnews.com
Harish Fatehchandani is a dedicated journalist with over a decade of experience in the media field. He is respected for his consistent and honest reporting.

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