राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर दिग्विजय सिंह का भाजपा पर हमला, कहा-12 करोड़ लोगों के चंदे का कहां है हिसाब, चंपत राय को बताया बेईमान

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उज्जैन। राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार, भाजपा और संघ पर बड़ा हमला किया है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि वर्ष 1992 के बाद राम मंदिर आंदोलन के दौरान करीब साढ़े 12 करोड़ लोगों ने चंदा दिया था, जिसका आज तक पूरा हिसाब जनता के सामने नहीं आया है। उन्होंने चंपत राय पर भी आरोप लगाए हैं।

चंपत राय से बेईमान कोई नहीं

दिग्विजय सिंह ने कहा कि भारत के इतिहास में आजादी के पहले व आजादी के बाद पहली बार ऐसी हुकूमत आई है, जिसकी हुकूमत में मंदिर की दान राशि में घोटाला हो रहा है। दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को निशाने पर लेते हुए कहा चंपत राय से बड़ा बेईमान और भ्रष्ट कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि केवल किसी ट्रस्टी के इस्तीफे से मामला खत्म नहीं होता। ट्रस्ट की व्यवस्था की जिम्मेदारी चंपत राय पर है और उन्हें पूरे मामले की जवाबदेही लेनी चाहिए।

12 करोड़ लोगों के चंदे का हिसाब कहां है

दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि वर्ष 1992 के बाद राम मंदिर आंदोलन के दौरान करीब साढ़े 12 करोड़ लोगों ने चंदा दिया था, जिसका आज तक पूरा हिसाब जनता के सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे ने जो एक करोड़ रुपये दिए और चांदी की शिलाएं दीं, उनकी रसीद और हिसाब अब तक नहीं मिला।

चंदा चोरी करने वालों को बचा रहा संघ

दिग्विजय सिंह ने कहा कि  यह आरएसएस मॉडल ऑफ गवर्नेंस है। आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद अयोध्या में चंदा चोरी करने वालों को बचाने में लगे हुए हैं। ये लोग सनातन का विनाश कर रहे हैं और सनातनियों के साथ धोखा कर रहे हैं।  दिग्विजय सिंह ने कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट के बाद अयोध्या में एफआईआर हुई, लेकिन दोषियों का रिमांड लिए जाने की बजाय उन्हें गिरफ्तार कर सीधे जेल भेज दिया गया। दिग्विजय ने मांग की कि दोषियों के खिलाफ विस्तृत जांच कर एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।

इसकी जिम्मेदारी पीएम मोदी की

दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है, इसलिए इसकी जिम्मेदारी भी उन्हीं की है।  दिग्विजय सिंह ने कहा कि आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद को धर्म और धार्मिक कार्यों से कोई मतलब नहीं है, उन्हें सिर्फ सत्ता से मतलब है। उन्होंने कहा कि इन संगठनों पर कोई कानून लागू नहीं होता और ये सनातनियों को ठग रहे हैं। उन्होंने कहा कि चंपत राय कौन हैं? उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। धर्म से उनका कोई लेना-देना नहीं है। वे संघ के प्रचारक रहे, बाद में विहिप ने उन्हें ले लिया। सादगी का नाटक करते हैं। चांदी की ईंट, जेवर, नकदी और विदेशी चंदे में गड़बड़ी पाई गई है। आरएसएस और विहिप से बड़ा बेईमान और गद्दार कोई नहीं है।

महाकाल मंदिर की जमीन पर संघ का कब्जा

महाकाल मंदिर की व्यवस्था पर हमला बोलते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे उस समय से विरोध कर रहे हैं, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा ने महाकाल मंदिर की जमीन आरएसएस से जुड़ी संस्था को दे दी थी। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में वे अदालत भी गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस ने मंदिर की जमीन पर कब्जा कर गेस्ट हाउस बना लिए हैं और साधु-संतों को महत्व नहीं दिया जा रहा। आज स्थिति यह है कि बजरंग दल की चिट्ठी के बिना भस्म आरती तक नहीं मिलती।

Harish Fatehchandani
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Harish Fatehchandani is a dedicated journalist with over a decade of experience in the media field. He is respected for his consistent and honest reporting.

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अयोध्या के राम मंदिर के लिए लगभग 500 वर्षों तक संघर्ष चला। 1528 में बाबरी मस्जिद के निर्माण के बाद से ही हिंदू समाज ने इसे वापस पाने के लिए लड़ाइयां शुरू कीं। 1528 से लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक यानी 2019 तक इस मुद्दे पर सैकड़ों बार छोटे-बड़े संघर्ष और कानूनी लड़ाइयां हुईं।