अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावा चोरी के मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि चढ़ावा चोरी में बैंक कर्मचारी भी शामिल थे। यही कर्मचारी दान का पैसा ट्रस्ट के दफ्तर से बैंक लेकर जाते थे। यह भी कहा जा रहा है कि चढ़ावा चोरी के आरोपी बैंक में ही मिलते थे और वहीं रकम का बंटवारा होता था।
बक्से में रखते समय उड़ा लेते थे रुपए
बताया जा रहा है कि नोटों के बंडल बक्से में रखते समय बैंक कर्मचारी चोरी कर लेते थे। चोरी की गई रकम का हिसाब-किताब वहां नहीं बल्कि बैंक परिसर में होता था। टिन्नू यादव जैसे सेवादारों के साथ ही बैंक कर्मचारी भी राम मंदिर चढ़ावे की रकम पर लगातार हाथ साफ कर रहे थे।
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हर दिन दो शिफ्ट में होती थी गिनती
राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती हर दिन दो शिफ्ट में दोपहर 2 बजे और रात 8 बजे 40 कर्मचारी करते थे। पहले ट्रस्ट के विश्वासपात्र लोगों की निगरानी में चढ़ावे की गिनती होती थी और फिर बैंक कर्मी पैसों को ट्रस्ट के दफ्तर से बैंक तक ले जाने की जिम्मेदारी निभाने वाली आउटसोर्सिंग फर्म के कर्मचारी, इंटरनल ऑडिटर्स एंड ट्रस्ट के सदस्यों के साथ करते थे।
छिपे हुए कैमरों ने खोला राज
बताया जाता है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को जब चोरी का संदेह हुआ तो तो ट्रस्ट ने कैश काउंटिंग रूम के अंदर उस समय गुपचुप तरीके से छिपे हुए निगरानी कैमरे लगवाए थे। हालांकि वहां पर दिखने वाले सीसीटीवी कैमरे पहले से ही लगे हुए थे, लेकिन जांचकर्ताओं ने पाया कि पैसे गिनने वाले स्टाफ के कुछ सदस्यों ने निगरानी के ‘ब्लाइंड स्पॉट्स’ का फायदा उठाने के तरीके निकाल लिए थे। जांच के दौरान, पता चला है कि एसआईटी को ऐसे फुटेज मिले हैं जिनमें कैश-काउंटिंग टीम के सदस्य जानबूझकर खुद को दिखने वाले सीसीटीवी कैमरों के ठीक सामने खड़ा कर रहे थे, ताकि नोटों के बंडलों को संभालते समय कथित तौर पर कैमरों के देखने के दायरे को बाधित किया जा सके। छिपे हुए कैमरों ने रिकॉर्डिंग जारी रखी, जिससे जांचकर्ता चोरी तक ले जाने वाली इन हरकतों को कैद करने में कामयाब रहे।
एफआईआर पर भी उठ रहे सवाल
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की एफआईआर को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। एफआईआर में किसी भी आरोपी के पिता का नाम व पता नहीं लिखा गया है। सवाल है कि क्या ट्रस्ट के पास अपने ही कर्मियों के बारे में पूरी जानकारी नहीं रहती है। वहीं दूसरी तरफ केस में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम लगाया गया है, मतलब इसमें कोई न कोई सरकारी कर्मचारी भी आरोपी है। वह बैंक का है। फिर भी उसको नामजद न करके अज्ञात कर दिया गया। इसके पीछे की मंशा सवाल खड़ा कर रही है।



