‘संतुलन’ बनाने के चक्कर में भाजपा को ‘डगमगा’ रहे सुमित मिश्रा, पहले कालिख पोतने वालों ने ‘हड़काया’, अब पार्षद कालरा ‘ब्लैकमेल’ पर उतरे

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इंदौर। जब से सुमित मिश्रा अध्यक्ष बने हैं, सब लोग कह रहे हैं कि संगठन अच्छा चल रहा है। बकौल सुमित मिश्रा वे सबसे तालमेल बनाकर चल रहे हैं। सबको संतुष्ट भी कर रहे हैं और एक-एक कार्यकर्ता का ध्यान भी रख रहे हैं। फिर कुछ ऐसी गतिविधियां लगातार क्यों हो रही हैं, जिससे पार्टी की बदनामी हो रही है।

मिश्राजी ने बहुत ही तालमेल से नापतौल कर नगर की कार्यकारिणी बनाई। अपने आकाओं से लेकर मददगार तक को संतुष्ट किया। सारे दोस्त-दुश्मन नेताओं का भी ख्याल रखा। सूची सामने आते ही जो हुआ वह इंदौर भाजपा के इतिहास में कलंक है। शायद ही कभी भाजपा कार्यालय के सामने किसी नगर अध्यक्ष का पुतला जला हो। पोस्टर और यहां तक कि कार्यालय के अंदर लगे नेमप्लेट पर कालिख भी पोत दी गई।

वह तो अच्छा हुआ कि इस घटनाक्रम से जुड़े एक नेता मिश्राजी घर पहुंच गए और कालिख पोतने वाले ने माफी मांग ली। आपने राहत की सांस ली, लेकिन भाजपा के अधिकांश नेता और कार्यकर्ता इसके लिए सजा की उम्मीद लगाए बैठे थे। उनका अभी भी यह मानना है कि सजा नहीं देना आगे भारी पड़ेगा।

अब पार्षद कालरा खुलेआम ब्लैकमेल पर उतरे

अब ताजा मामला पार्षद कमलेश कालरा का है। कालरा का एक नया ऑडियो सामने आया है, जिसमें वे अपने दोस्त नरेंद्र सोनी से मोबाइल पर बात कर रहे हैं। कालरा नरेंद्र सोनी से कह रहे हैंमैंने जीतू यादव से कहा था कि उनके साथ समझौता तभी होगा, जब सचिन जैसवानी, आदर्श सचान, सरिता बहरानी पर कार्रवाई होगी। कालरा ने कहाइनकी गिरफ्तारी हो और पॉक्सो लगे। इसके बिना कोई समझौता नहीं होगा। इस संबंध में विधायक गोलू शुक्ला, एकलव्य गौड़, नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा, मनीष मामा से भी बात हुई है।

भाजपा नेता भी हैरान-आखिर हो क्या रहा है

अब भाजपा के लोग ही आखिर पार्टी मे हो क्या रहा है? इंदौर भाजपा पर कालिख पोतने वालों को सुमित मिश्रा ने छोड़ दिया, लेकिन कमलेश कालरा के मामले को तो गंभीरता से लेते। लोग तो यह भी कह रहे हैं कि जिस रमेश मेंदोला के दम पर नगर अध्यक्ष की कुर्सी मिली है, कम से कम उससे ही वफादारी निभा देता। जीतू यादव तो रमेश मेंदोला का ही समर्थक था। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस तरह तो कोई भी आपको ब्लैकमेल करता रहेगा और आप होते रहोगे।

पार्टी की कीमत पर संतुलन किस काम का

भाजपा के कई नेता और कार्यकर्ता कह रहे हैं कि सुमित मिश्रा सभी गुटों और नेताओं से संतुलन बनाने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन कहीं ऐसा न हो कि संतुलन बनाने के चक्कर में सब कुछ असंतुलित हो जाए। भाजपा एक कैडर वाली अनुशासित पार्टी है। अगर इसी में अनुशासन न रहा तो फिर कांग्रेस और इसमें क्या फर्क रह जाएगा? भाजपा नेताओं का मानना है कि अनुशासन का डर तो हर कार्यकर्ता में होना चाहिए और यह तभी संभव है जब तत्काल एक्शन लिया जाए।

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