ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के लाल टिपारा गौशाला में गुरुवार को आग लग गई। प्रदेश के सबसे बड़ी इस गौशाला में उस समय एक हजार से अधिक गौवंश मौजूद थे। अभी तक इस घटना में गौवंशों के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है।
बताया जाता है कि ग्वालियर शहर से 15 किलोमीटर दूर लाल टिपारा गौशाला में गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे भीषण आग लग गई, आग लगने के समय पास के एक बाड़े में करीब एक हजार से अधिक गौवंश मौजूद थे। यह आग गौशाला परिसर में स्थित वैदिक डेस्टिनेशन क्षेत्र में लगी थी, जहां घास के सोफे, झोपड़ियां आदि जलकर पूरी तरह राख हो गए। सूचना मिलते ही दमकल की टीम मौके पर पहुंची और चार गाड़ियों से पानी की बौछार कर आग पर काबू पा लिया। राहत की बात यह रही कि आग से किसी भी गोवंश को कोई नुकसान नहीं हुआ।
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बताया जाता है कि लाल टिपारा गौशाला के सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थल पर बने टपरे में आग लगी थी। हालांकि, अब तक आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। आग लगते ही उसने तेजी से विकराल रूप धारण कर लिया। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने समय रहते गोवंश को सुरक्षित निकालकर दूसरे बाड़े में शिफ्ट कर दिया।
लाल टिपारा गौशाला के प्रबंधक महंत ऋषभदेव का कहना है कि होली का त्योहार नजदीक है, इसलिए गौशाला में गौमैट गुलाल बनाने को लेकर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान अचानक शॉर्ट सर्किट हो गया, जिससे आग लग गई। गौशाला में फैशनेबल बैठने की विशेष व्यवस्था बनाई गई थी, जो पूरी तरह जलकर राख हो गई। हालांकि, आग में किसी भी गौवंश को कोई नुकसान नहीं हुआ। इस गौशाला का संचालन कुछ वर्ष पहले संतों को सौंपा गया था। तब से यह देश की सबसे आदर्श गौशाला बन गई है। यह गौशाला देश की पहली आधुनिक और आत्मनिर्भर गौशाला है।



