डीसी बोर्ड की मनमानी से डेली कॉलेज में शिक्षा का कबाड़ा, 10वीं-12वीं के रिजल्ट में आगे निकला एमरल्ड

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इंदौर। मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित डेली कॉलेज में डीसी बोर्ड की मनमानी के कारण यहां शिक्षा की गुणवत्ता का कबाड़ा हो गया है। बोर्डिंग की हालत खराब हो गई और पैरेंट्स द्वारा लगातार शिकायतों के बाद भी कोई सुधार नहीं हो रहा। यही वजह है कि रिजल्ट के मामले में शहर के दूसरे स्कूल डेली कॉलेज से आगे निकलते जा रहे हैं।

एजीएम के बिना ही हो रहे सारे निर्णय

डेली कॉलेज का संचालन बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा किया जाता है। यह मध्यप्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के तहत रजिस्टर्ड संस्था है। इसके तहत बिना एजीएम कोई फैसला नहीं हो सकता, लेकिन डीसी बोर्ड कोई भी सरकारी नियम नहीं मानता। एजीएम में सारे सदस्यों को बुलाकर फैसले लेने का प्रावधान है, लेकिन बोर्ड के 9 सदस्य ही खुद को एजीएम मानते हैं। कायदे से बोर्ड को डेली कॉलेज का पूरा लेखा-जोखा फर्म्स एंड सोसायटी में जमा कराना चाहिए, लेकिन सूत्र बताते हैं कि ऐसा नहीं होता।

सरकार के दो प्रतिनिधि, फिर भी नहीं लगता अंकुश

ताज्जुब तो तब होता है कि जब इस बोर्ड में प्रदेश सरकार के दो प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं। इसके बाद भी मनमाने फैसलों पर रोक नहीं लगता। बोर्ड जब भी किसी मामले में उलझता है तो उसे फर्म्स एंड सोसाटी और उसके एक्ट याद आने लगते हैं, लेकिन बाद में किसी को कोई नियम याद नहीं रहता। एक बात और जब कई बार ऐसा हुआ है कि शासन के वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों ने यहां के मामलों में हस्तक्षेप किया, लेकिन वे सारे मामले बोर्ड सदस्यों के हितों से जुड़े हुए थे। जब भी कॉलेज हित की बात आती है कोई हस्तक्षेप नहीं करता। यहां तक कि पैरेंट्स की शिकायतों का समाधान भी नहीं होता।

बोर्ड की मनमानी के कारण हॉस्टल हैं खाली

डेली कॉलेज में लगभग 1650 छात्र शिक्षा प्राप्त करते हैं जिसमे लड़के, लड़कियां दोनो शामिल हैं। पिछले कुछ वर्षों से डेली कॉलेज की छवि लगातार खराब हुई है एवं शैक्षणिक स्तर में गिरावट आई है। इसके कारण बोर्डिंग एडमिशन में जबरजस्त कमी आई है। हॉस्टल खाली पड़े हैं। टीचर अप्वाइंटमेंट जो कि संस्था का आधार स्तंभ है उसमें गुणवत्ता का ध्यान नहीं दिया जाता और भेदभाव किया जाता है। शिक्षक को कोई प्रोत्साहन नहीं है। 70% से अधिक छात्रों को बाहर ट्यूशन का सहारा लेना पर रहा है। छात्रों को स्कूल स्तर पर जो संस्कार देना चाहिए, उस तरफ कोई विशेष ध्यान नहीं है।

12 वीं सीबीएसई बोर्ड में फिसड्‌डी

शिक्षा की गुणवत्ता बिगड़ने के कारण ही शहर के दूसरे स्कूल डेली कॉलेज से आगे निकलते जा रहे हैं। पहले जहां डेली कॉलेज में पढ़ना प्रतिष्ठा का विषय था अब दूसरे स्कूल उसे मुंह चिढ़ा रहे हैं। यही वजह है कि 2025 के 12वीं सीबीएससी बोर्ड के रिजल्ट में एमरल्ड हाईट्स डेली कॉलेज से काफी आगे निकल गया। डेली कॉलेज का जहां ओवरऑल स्कोर 82 प्रतिशत रहा, वहीं एमरल्ड का 86 प्रतिशत है। डेली कॉलेज के जहां मात्र 5 स्टूडेंट 95 प्रतिशत से अधिक नंबर ला पाए, वहीं एमरल्ड में यह संख्या 33 रही। इसी तरह 90 प्रतिशत से अधिक नंबर लाने वालों में डेली कॉलेज के मात्र 30 स्टूडेंट शामिल हैं, वहीं एमरल्ड में यह संख्या 106 रही। अलग-अलग विषयों में 100 में से 100 नंबर लाने वाले स्टूडेंट्स में डेली कॉलेज का आंकड़ा11 रहा, वहीं एमरल्ड के 42 स्टूडेंट्स इसमें शामिल हैं।

10 वीं के रिजल्ट में एमरल्ड निकला आगे

12वीं सीबीएसई बोर्ड की तरह की 10वीं का भी हाल रहा। डेली कॉलेज का ओवरऑल एवरेज स्कोर जहां 82 प्रतिशत रहा, वहीं एमरल्ड का 85 प्रतिशत रहा। इसी तरह 95 प्रतिशत से अधिक नंबर लाने वाले स्टूडेंट्स में डेली कॉलेज का आंकड़ा 8 पर खत्म हो गया, जबकि एमरल्ड के 36 स्टूडेंट्स ने यह उपलब्धि हासिल की। डेली कॉलेज के मात्र 25 स्टूडेट्स 90 प्रतिशत से अधिक अंक ला पाए, वहीं एमरल्ड के 127 स्टूडेंट्स ने यह कारनामा कर दिखाया। इससे साफ जाहिर है कि डेली कॉलेज में शिक्षा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ती जा रही है और डीसी बोर्ड का इस पर बिल्कुल ही ध्यान नहीं है। अगर यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं, जब प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के नक्शे से डेली कॉलेज गायब हो जाएगा।

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