राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर जताया Gen-Z अंदाज में तंज, हाथ में तख्ती लेकर संसद से मार्च निकाला। इस विरोध प्रदर्शन में विपक्षी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। यह विरोध प्रदर्शन 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में हुआ।
विरोध प्रदर्शन में राहुल गांधी का Gen-Z तंज
विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी हाथ में एक तख्ती लेकर पहुंचे, जिस पर ‘Gyanesh, it’s done, bro’ लिखा था। यह तख्ती सोशल मीडिया पर भी वायरल हुई। राहुल गांधी ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “Gyanesh, it’s done, bro. Time to resign.” इस Gen-Z अंदाज के तंज से विरोध प्रदर्शन में एक नई ऊर्जा आई।
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इस तख्ती का इस्तेमाल राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर तंज कसने के लिए किया, जो विरोध प्रदर्शन का केंद्र बिंदु था।

चुनाव आयोग पर मतदाता सूची को लेकर गंभीर आरोप
विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के जरिए नए और युवा मतदाताओं को वोटिंग अधिकार से वंचित किया जा रहा है। इस वजह से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई।
विपक्ष का मानना है कि यह प्रक्रिया लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है और इससे युवाओं की भागीदारी कम होगी। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।
प्रमुख विपक्षी नेताओं की भागीदारी
इस विरोध प्रदर्शन में राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। उन्होंने चुनाव आयोग के खिलाफ एकजुटता दिखाई।
नेताओं ने मार्च के दौरान कई नारों के साथ अपनी मांगों को जोरदार तरीके से रखा।

सुरक्षा बलों की बैरिकेडिंग और नेताओं की हिरासत
दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को चुनाव आयोग मुख्यालय से लगभग 400 मीटर पहले रोक दिया। वहां बैरिकेडिंग लगाकर मार्च को रोका गया।
प्रदर्शन की अनुमति न होने के कारण पुलिस ने प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में ले लिया। इसके बाद विरोध प्रदर्शन धरने में तब्दील हो गया।
चुनाव आयोग और भाजपा का रुख
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को भ्रामक और निराधार बताया। आयोग ने कहा कि मतदाता सूची सुधार प्रक्रियाएं नियमों के तहत और सभी पक्षों की सहमति से हो रही हैं।
सरकार का तर्क है कि यह प्रक्रिया लोकतंत्र को मजबूत करने वाली है और कोई भी मतदाता वंचित नहीं किया जा रहा।



