भारतीय नौसेना ने ‘मेक इन इंडिया’ को नई गति देते हुए एक अहम पहल की है। नौसेना ने अपने अत्याधुनिक मिग-29k लड़ाकू विमानों की महत्वपूर्ण उप-प्रणालियों और परीक्षण प्रणालियों के स्वदेशी विकास के लिए भारतीय निजी कंपनियों को आमंत्रित किया है।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है, ताकि समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में तैनात ये विमान हर समय पूरी क्षमता के साथ तैयार रह सकें।
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मिग-29k एक सुपरसोनिक, हर मौसम में सक्षम बहु-भूमिका लड़ाकू विमान है, जो आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत जैसे विमानवाहक पोतों से संचालित होता है। यह हवाई वर्चस्व, समुद्री हमले और समुद्री नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण अभियानों में अहम भूमिका निभाता है।
हालांकि, पिछले कुछ समय से इसके रखरखाव और पुर्जों की उपलब्धता को लेकर चुनौतियां सामने आई हैं। कई बार समय पर मेंटेनेंस न हो पाने के कारण इसकी परिचालन क्षमता प्रभावित होती रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए नौसेना ने स्वदेशी निजी कंपनियों, एमएसएमई और रक्षा क्षेत्र की फर्मों को इस परियोजना में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है।
नौसेना ने स्पष्ट किया है कि वही भारतीय कंपनियां इस पहल में शामिल होंगी, जिनके पास तकनीकी दक्षता, वित्तीय क्षमता, आवश्यक बुनियादी ढांचा और अनुभव मौजूद हो। ये कंपनियां रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों और अनुसंधान संगठनों के साथ मिलकर काम कर सकती हैं।
इस पहल से न केवल देश की स्वदेशी निर्माण क्षमता को मजबूती मिलेगी, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला पर नियंत्रण बढ़ाकर राष्ट्रीय सुरक्षा को भी नया बल मिलेगा।



