नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को एक कार्यक्रम में भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश इस समय एक बड़ी वैचारिक लड़ाई के दौर से गुजर रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि किसी एक समूह या व्यक्ति को यह मानने का अधिकार नहीं है कि वह देश की 1.5 अरब आबादी की सच्चाई जानता है। यही आरएसएस के साथ मेरी समस्या है।
आरएसएस ने तय कर लिया है कि वह 1.5 अरब लोगों की सच्चाई जानता है। मैं कहता हूं कि केवल 1.5 अरब लोग ही अपनी सच्चाई जान सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर वह यह मान लें कि वह किसी दूसरे व्यक्ति की सच्चाई जानते हैं तो यह गलत होगा, क्योंकि उन्होंने उस व्यक्ति के अनुभवों और परिस्थितियों को नहीं देखा है।
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पीएम मोदी के बयान का किया जिक्र
राहुल गांधी ने कहा कि आज देश में वैचारिक लड़ाई सिर्फ पर्यावरण, राजनीति या स्वतंत्र मीडिया जैसे मुद्दों तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, असली सवाल यह है कि क्या कोई समूह यह तय कर सकता है कि देश के हर व्यक्ति की सच्चाई वही जानता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छात्रों से जुड़े एक बयान का जिक्र करते हुए कहा कि इसका मतलब यह संदेश देना है कि मैं सब कुछ जानता हूं, आप कुछ नहीं जानते राहुल गांधी ने कहा कि जब छात्रों ने विरोध किया तो मोहन भागवत की ओर से भी छात्रों पर हमला नहीं करने की बात कही गई, लेकिन उनके अनुसार छात्रों पर लगातार हमला इसलिए हो रहा है क्योंकि कुछ लोग मानते हैं कि वे उनकी सच्चाई जानते हैं।
हर कारोबार का एक ही मालिक
राहुल गांधी ने कहा कि अगर देश के हर कारोबार का मालिक एक ही व्यक्ति हो तो बड़ी आबादी के लिए स्वराज संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर एक व्यक्ति इस देश के हर एक कारोबार का मालिक है तो भारतीय लोगों की बड़ी आबादी के लिए स्वराज की कोई संभावना नहीं है। देश में कुछ लोगों के पास एयरपोर्ट, बंदरगाह और कंपनियां होनी चाहिए, जबकि दूसरे लोग ऐसे नौकरशाह होने चाहिए जो अपनी बात स्वतंत्र रूप से रख सकें और किसी कारोबारी के प्रभाव में आकर काम करने के लिए मजबूर न हों।
पूंजीपतियों के कब्जे पर जताई चिन्ता
देश की आर्थिक स्थिति और पूंजीपतियों के कब्जे पर चिंता जताते हुए राहुल गांधी ने कहा कि अगर देश के तमाम बिजनेस, एयरपोर्ट, बंदरगाह और सीमेंट कंपनियां कुछ चुनिंदा लोगों के पास होंगी, तो आम लोगों के लिए ‘स्वराज’ की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और राजीव गांधी का स्वराज का विजन ऐसी महंगी शिक्षा, अन्यायपूर्ण परीक्षा प्रणाली और एकाधिकार वाली वित्तीय व्यवस्था के साथ कभी साकार नहीं हो सकता। इसके लिए पंचायती राज, विधायकों और सांसदों तक फैली एक मजबूत और जमीनी राजनीतिक व्यवस्था की जरूरत है।
अल्पसंख्यकों को हाशिए पर धकेलने की साजिश
राहुल गांधी ने भाजपा पर सामाजिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि देश की 17% आबादी (मुसलमान, ईसाई, सिख) को यह अहसास कराया जा रहा है कि उनका कोई अस्तित्व ही नहीं है। इसी तरह 10% आदिवासियों की जमीनों पर नजर है और 15% दलितों के सामाजिक दमन की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस देश के हर व्यक्ति—चाहे वह किसी भी धर्म, समुदाय, उम्र या लिंग का हो—को यह महसूस होना चाहिए कि यह देश उसका है। इसी सोच और व्यवस्था को बदलने के लिए आज संघर्ष की जरूरत है।



