दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद पर सनातन धर्म को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि RSS-VHP ने हिंदुत्व के नाम पर सनातन धर्म को बिगाड़ा है, जो धर्म के असली स्वरूप से मेल नहीं खाता।
सनातन स्वाभिमान यात्रा की घोषणा और उद्देश्य
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 20 अक्टूबर 2026 से ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालने की घोषणा की है। यह यात्रा उज्जैन के शिवधाम से शुरू होकर अयोध्या के रामधाम तक जाएगी। उनका कहना है कि इस यात्रा का उद्देश्य धर्म के नाम पर हो रही लूट-खसोट के खिलाफ जन-जागरूकता फैलाना है।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि यह यात्रा किसी राजनीतिक दल का विरोध नहीं है, बल्कि धर्म की सच्ची भावना को बचाने का प्रयास है। उनका मुख्य ध्येय वाक्य “यतो धर्मस्ततो जयः” है, जिसका अर्थ है जहाँ धर्म है, वहाँ विजय है।

RSS और VHP पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप
दिग्विजय सिंह ने अयोध्या राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित चंदे और चढ़ावे में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के नाम पर लिए गए दान में करोड़ों रुपये का घपला हुआ है।
इसके अलावा, विदेशी दानों की रसीदें नहीं दी गईं और इस धन का इस्तेमाल निजी संपत्ति और वाहन खरीदने में किया गया। दिग्विजय का मानना है कि RSS और VHP इन गतिविधियों से धर्म की असली छवि को धक्का पहुंचा रहे हैं।
हिंदुत्व और सनातन धर्म के बीच फर्क
दिग्विजय सिंह ने हिंदुत्व और सनातन धर्म के बीच स्पष्ट अंतर बताया। उन्होंने कहा कि वे स्वयं सनातन धर्म के सच्चे अनुयायी हैं। उन्होंने RSS और भाजपा के हिंदुत्व को केवल राजनीतिक सत्ता पाने और जमीन हड़पने का माध्यम बताया।
उनके अनुसार, हिंदुत्व का यह स्वरूप सनातन धर्म की करुणा, भाईचारा और शांति की भावना के विपरीत है। यह आरोप उन्होंने इस बात के समर्थन में दिया कि RSS-VHP का धर्म से कोई वास्तविक सरोकार नहीं है।
दिग्विजय के पुराने अनुभव और वीएचपी के साथ संबंध
दिग्विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने 1988-89 में वीएचपी द्वारा शुरू किए गए ‘रामशिला पूजन’ अभियान में भाग लिया और दान दिया था। हालांकि बाद में उन्होंने महसूस किया कि उस दान का दुरुपयोग हुआ है।
यह अनुभव उन्हें RSS और VHP की गतिविधियों के प्रति सतर्क करता है। वे इस बात पर जोर देते हैं कि धर्म की आड़ में वित्तीय भ्रष्टाचार और लूट को समाप्त करना जरूरी है।
आम जनता पर असर और धार्मिक एकता का सवाल
दिग्विजय सिंह के आरोपों का आम जनता पर गहरा असर पड़ सकता है। धार्मिक आस्थाओं के साथ छेड़छाड़ और वित्तीय भ्रष्टाचार से विश्वास कमजोर होता है। इससे समाज में धार्मिक एकता और भाईचारे पर भी प्रश्न उठते हैं।
यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए चिंता का विषय होगा। इसलिए इस मुद्दे पर व्यापक जांच और पारदर्शिता की मांग की जा रही है।
आगे क्या हो सकता है और संभावित प्रतिक्रियाएं
दिग्विजय सिंह की इस घोषणा के बाद RSS और VHP की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। संभव है कि वे इन आरोपों का खंडन करें या सफाई दें। वहीं, कांग्रेस के अन्य नेताओं और धार्मिक संगठनों की भी प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
इस ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ से राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही स्तरों पर बहस तेज हो सकती है। यह यात्रा सनातन धर्म की मूल भावना को लेकर एक व्यापक चर्चा का केंद्र बन सकती है।



