कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सनातन धर्म और हिंदुत्व को लेकर अपने स्पष्ट विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म और हिंदुत्व दो बिल्कुल अलग अवधारणाएं हैं, जिनका आपस में कोई संबंध नहीं है। दिग्विजय सिंह के इस बयान ने राजनीतिक और धार्मिक चर्चा को फिर से सक्रिय कर दिया है।
दिग्विजय सिंह ने समझाया सनातन धर्म और हिंदुत्व में फर्क
दिग्विजय सिंह ने शाजापुर में एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि सनातन धर्म का मूल उद्देश्य सभी धर्मों का सम्मान करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदुत्व शब्द का जन्म वीर सावरकर ने किया था, जबकि सनातन धर्म हजारों वर्ष पुराना है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में नफरत या कटुता का कोई स्थान नहीं है।
👉 यह भी पढ़ें:
- सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा को लेकर साध्वी हर्षानंद गिरी ने दिग्विजय सिंह पर किया कटाक्ष
- दिग्विजय सिंह बोले- सिंधिया और कमलनाथ के ईगो से गिरी मध्य प्रदेश सरकार
- बाबा बागेश्वर का रथ तैयार, नवरात्रि से शुरू हो रही 500 किमी रथ यात्रा
- 80 के दिग्विजय सिंह ने पदयात्रा और उम्र पर तंज करने वालों को दिया करारा जवाब
- दिग्विजय का आरोप: RSS-VHP ने हिंदुत्व के नाम पर सनातन धर्म को बिगाड़ा
- दिग्विजय सिंह का बड़ा आरोप: सागर SP हर महीने वसूलते हैं 50 लाख, EOW जांच मांग
उन्होंने आगे कहा, “मैं कभी भी हिंदुत्व का समर्थक नहीं रहा और न ही कभी इसका समर्थन करूंगा। सनातन धर्म प्रेम और सद्भाव का संदेश देता है, जबकि हिंदुत्व की विचारधारा में विभाजन की बात की जाती है।”

कुरान पढ़ने के बाद भी हिंदुत्व नहीं माना
दिग्विजय सिंह ने यह भी बताया कि उन्होंने कुरान का अध्ययन किया है और राम को अपना इष्ट देव माना है। इसके बावजूद वे राजनीतिक हिंदुत्व की विचारधारा को स्वीकार नहीं करते। उन्होंने कहा कि कुरान में काफिर शब्द का मतलब है जो किसी भी धर्म को नहीं मानता, लेकिन इस्लाम के अलावा किसी को काफिर कहना गलत है।
इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि दिग्विजय सिंह धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देते हैं और धार्मिक कट्टरता के खिलाफ हैं।
आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद पर आरोप
दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) पर सनातन धर्म को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ये संगठन धर्म के नाम पर देश में विभाजन पैदा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आरएसएस की विचारधारा नफरत से भरी है, जो भारतीय संविधान और देश के मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने संविधान के सम्मान की बात करते हुए बताया कि आरएसएस ने संविधान और राष्ट्रीय ध्वज जलाए हैं।

सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा का ऐलान
धर्म के राजनीतिक दुरुपयोग के विरोध में दिग्विजय सिंह ने उज्जैन से अयोध्या तक ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालने का ऐलान किया है। यह यात्रा सनातन धर्म के वास्तविक मूल्यों को सामने लाने और देश में धार्मिक सद्भाव बढ़ाने का प्रयास है।
यात्रा के दौरान वे विभिन्न जगहों पर लोगों से संवाद करेंगे और धर्म के दुरुपयोग के खिलाफ जागरूकता फैलाएंगे। यह कदम राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राम मंदिर चंदा विवाद पर दिग्विजय सिंह का बयान
दिग्विजय सिंह ने अयोध्या राम मंदिर निर्माण न्यास के ट्रस्टियों पर चंदे के धन में हेरफेर का आरोप लगाया। उन्होंने सार्वजनिक बहस की चुनौती दी और कहा कि जिसने चंदा चोरी की, उसी ने वोट चोरी भी की है।
उन्होंने इस मामले में प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। यह विवाद राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इसका असर चुनावी राजनीति पर भी पड़ सकता है।
हिंदू साधु-संत और भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया
दिग्विजय सिंह के इन बयानों के बाद हिंदू साधु-संतों, विश्व हिंदू परिषद और भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दिग्विजय सिंह के बयान को निंदनीय बताया और कहा कि इस तरह के बयान धार्मिक भावनाओं को आहत करते हैं।
राजनीतिक रूप से यह बयान विपक्ष और सरकार के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है। इस विवाद का आम जनता पर भी प्रभाव देखने को मिल सकता है।



