दाहोद, गुजरात: सरकारी विभाग का नाम, अधिकारियों जैसा व्यवहार, नकली मुहर और फर्जी दस्तावेज—गुजरात के दाहोद से सामने आया कथित फर्जी सरकारी दफ्तर घोटाला हैरान करने वाला है। आरोप है कि सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के नाम पर छह नकली सरकारी कार्यालय चलाए गए और सरकारी फंड हासिल करने के लिए 121 फर्जी कामों को मंजूरी दिलाई गई।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के मुताबिक, मुख्य आरोपी अबूबकर जकीराली सैयद और उसके सहयोगियों ने कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेज, हस्ताक्षर और मुहरों का इस्तेमाल किया। इसके जरिए सरकारी ग्रांट हासिल की गई और रकम को कई बैंक खातों के जरिए घुमाया गया।
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9 खातों से 118 खातों तक पहुंचा पैसा
जांच एजेंसी के अनुसार, सरकारी विभागों से प्राप्त रकम सबसे पहले फर्जी सरकारी कार्यालयों के नाम पर खोले गए 9 बैंक खातों में जमा की गई। इसके बाद रकम को 18 मध्यवर्ती खातों के जरिए आगे ट्रांसफर किया गया और अंततः आरोपी से जुड़े लोगों व संस्थाओं के 118 अन्य बैंक खातों में भेजा गया।
ED का आरोप है कि इस रकम को बाद में प्रॉपर्टी खरीदने, शेयरों और म्यूचुअल फंड में निवेश करने समेत अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल किया गया। जांच में सामने आए मनी ट्रेल के आधार पर ED ने कार्रवाई करते हुए कई संपत्तियों और वित्तीय परिसंपत्तियों को जब्त किया है।
22.70 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त
ED के अनुसार, जब्त की गई संपत्तियों की कुल कीमत 22.70 करोड़ रुपये है। इनमें जमीन के सात टुकड़े, म्यूचुअल फंड निवेश और विभिन्न बैंक खातों में जमा रकम शामिल है। ये संपत्तियां मुख्य आरोपी, उसके परिवार के सदस्यों और कथित सहयोगियों से जुड़ी बताई गई हैं।
यह मामला सरकारी फंड की निगरानी, फर्जी दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, जांच एजेंसी के आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होना बाकी है।
आपकी राय क्या है?
क्या सरकारी विभागों के नाम पर ऐसे फर्जी कार्यालय चलाना सिस्टम की बड़ी चूक नहीं है? क्या सरकारी फंड की निगरानी और डिजिटल वेरिफिकेशन को और मजबूत किया जाना चाहिए?
आप इस कथित घोटाले को लेकर क्या सोचते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



