फिल्म समीक्षा : करेले जैसी केरला स्टोरी 2

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डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी, वरिष्ठ पत्रकार

मेरा सलीम वैसा नहीं है।पर है।

मेरा फैज़ान वैसा नहीं है।पर वो है।

मेरा रशीद वैसा नहीं है“. पर वो भी है। नहीं होगा तोपिच्चरबनेगी कैसे?

इसमें #केरल के बाहर के राज्यों की तीन लड़कियों कीकहानीहै, जो बताती है कि 2047 तक भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने की साजिशें हैं। लव जिहाद के लिए लाखों रुपये मिलते हैं।

इसमें छांगुर बाबा भी हैं और बीफ भी। हिन्दू लड़कियों को ही निशाना बनाया जाता है। कोलकाता से आगरा के बीच इकोनॉमिक कॉरिडोर जैसा धर्मान्तरण कॉरिडोर है। हिन्दू परिवार सभ्य होते हैं, ‘उनमेंकेवल बलात्कारी, व्यभिचारी और धर्मांध लोग। कानून की मजबूरियां हैं। कल्चरल डीएनए, पुलिस की गैरकानूनी हरकतें और बुलडोजर भी है। इंदौर की कलाकार पूर्वा पराग भी है।

यह कोईएजेंडा फिल्मनहीं है, क्योंकि यह केवल एजेंडा है, फिल्म नहीं।

अझेलनीय।

Ardhendu Bhushan (Consulting Editor)
Ardhendu Bhushan (Consulting Editor)http://www.hbtvnews.com
Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

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