इंदौर। शहर की कई गृह निर्माण संस्थाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने वाले इंदौर के सहकारिता निरीक्षक संजय कूचनकर का एक बार फिर से जबलपुर ट्रांसफर हो गया है। इससे पहले भी उनका ट्रांसफर जबलपुर हुआ था, लेकिन वे कोई न कोई बहाना बनाकर इंदौर से रिलीव नहीं हुए। इस बार देखना है कि वे रिलीव होते हैं या नहीं।
सहकारिता विभाग की अवर सचिव गायत्री पाराशर ने 15 जून को यह ट्रांसफर आदेश निकाला है। इसमें 14 सहकारी निरीक्षकों का ट्रांसफर किया गया है, जिसमें संजय कूचनकर का नाम भी है। उनका ट्रांसफर जबलपुर हुआ है। आदेश के मुताबिक यह आदेश तत्काल प्रभाव से प्रभावशील हो गया है और दो हफ्ते के अंदर स्थानांतरित कर्मचारी को रिलीव करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही इस आदेश में यह भी लिखा है कि अगर स्थानांतरित कर्मचारी नई पदस्थापना पर ज्वाइन नहीं करता तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
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कर्मचारीगण संस्था में किया जमकर भ्रष्टाचार
सहकारिता निरीक्षण संजय कूचनकर की काफी शिकायतें हैं। इसने कर्मचारीगण गृह निर्माण संस्था सहित कई संस्थाओं में जमकर भ्रष्टाचार किया है। कर्मचारीगण की वरीयता सूची का मामला अभी हाईकोर्ट में उलझा हुआ है इस सूची को फाइल कराने में कूचनकर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
कूचनकर ने जमाया था वरीयता सूची का खेल
कर्मचारीगण गृह निर्माण संस्था की वरीयता सूची का खेल जमाने में संजय कूचनकर का बहुत बड़ा हाथ है। सूत्र बताते हैं कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड पूर्व उप अकेक्षक आनंद पाठक है। उसने वरीयता सूची के लिए पूर्व डीआर को 40 लाख रुपए दिए थे। पाठक ने वर्तमान सहकारिता निरीक्षक संजय कूचनकर को 20 लाख रुपए दिए हैं। सूत्रों के अनुसार संजय कूचनकर ने पुराने डीआर की बनाई सूची में छेड़छाड़ नहीं करने के एवज में वर्तमान डीआर को 12 लाख रुपए दिए थे।
बेटी के नाम से ले लिया था प्लॉट
कूचनकर पहले भी विवादों में रह चुके हैं। उन्होंने अपनी बेटी आयुषी कूचनकर के नाम से प्लॉट भी लिया था, जिसकी शिकायत हुई थी। आनंद पाठक संस्था के सभी सदस्यों से 20 लाख रुपए प्रति प्लॉट की वसूली कर रहा है, जिसकी बंदरबांट भी हो रही है।
पहले भी हो चुका है ट्रांसफर
शिकायतों के बाद संजय कूचनकर का पहले भी जबलपुर ट्रांसफर हो चुका है, लेकिन वह किसी न किसी बहाने रिलीव नहीं हुआ। इस बार भी वह अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर रिलीव नहीं होने की कोशिश करेगा। अब देखना यह है कि इस बार ट्रांसफर आदेश का पालन हो पाता है या नहीं।



