दुनिया की निगाहें एक बार फिर अमेरिका और ईरान पर टिक गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसा दावा किया है जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप के अनुसार, ईरान ने सहमति दे दी है कि वह अब कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। इस ऐतिहासिक दावे के साथ अमेरिका और ईरान के बीच एक नए समझौते (MoU) का रास्ता भी साफ होता नजर आ रहा है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा, “ईरान ने परमाणु हथियार न रखने पर सहमति जताई है। अमेरिका द्वारा ईरान को 300 मिलियन डॉलर देने की खबर पूरी तरह फर्जी है और इसे राजनीतिक कारणों से फैलाया गया है।”
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रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए समझौते का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार विकसित न कर सके। इसके बदले ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंधों में राहत दी जा सकती है, लेकिन यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि तेहरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु जांच में कितना सहयोग करता है और अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कितनी पारदर्शिता दिखाता है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि ट्रंप की शांति रणनीति सफल रही है। उनके अनुसार, ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकना ही इस समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की प्रतिबंध राहत तभी मिलेगी जब ईरान अपने यूरेनियम भंडार को समाप्त करेगा और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण स्वीकार करेगा।
सूत्रों के अनुसार, इस समझौते पर इस सप्ताह के अंत में जिनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर हो सकते हैं। इस प्रक्रिया में स्विट्जरलैंड, कतर और पाकिस्तान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ट्रंप ने इस दस्तावेज को “बेहद प्रभावशाली” बताते हुए कहा है कि हस्ताक्षर के बाद इसे सार्वजनिक किया जाएगा।

हालांकि, इस बीच इजरायल ने अपना कड़ा रुख बरकरार रखा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दोहराया कि समझौता हो या न हो, इजरायल ईरान को कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई मुद्दों पर उनकी और ट्रंप की राय अलग हो सकती है, लेकिन इजरायल की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह समझौता वास्तव में Middle East में स्थायी शांति की शुरुआत करेगा, या फिर इजरायल और ईरान के बीच तनाव का नया अध्याय खुलने वाला है? और क्या ट्रंप का यह कदम वैश्विक कूटनीति की सबसे बड़ी जीत साबित होगा?
आपकी क्या राय है? क्या ईरान पर भरोसा किया जा सकता है, या परमाणु कार्यक्रम को लेकर खतरा अभी भी बना हुआ है? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं।



