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नई दिल्ली। भारतीय राजनीति के दिग्गज नेता भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माक्सर्वादी) के महासचिव सीताराम येचुरी का गुरुवार को निधन हो गया। उन्होंने 72 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। 19 अगस्त को उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था।
सीताराम येचुरी का जन्म मद्रास (अब चेन्नई) में 12 अगस्त 1952 को एक तेलुगु भाषी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका बचपन हैदराबाद में बीता। सीताराम येचुरी ने हैदराबाद के ऑल सेंट्स हाई स्कूल से मैट्रिक किया। 1969 के तेलंगाना आंदोलन के बाद वे दिल्ली आ गए। यहां उन्होंने प्रेजिडेंट एस्टेट स्कूल में दाखिला ले लिया। 1970 में सीबीएसई उच्चतर माध्यमिक परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज में प्रवेश लिया। 1975-1977 के आपातकाल के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
स्टूडेंट्स फेडरेशन से राजनीति में एंट्री
येचुरी ने 1974 में भारतीय राजनीति में कदम रखा। उस समय वे वे स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सदस्य बने। वे 1975 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) में शामिल हो गए। येचुरी उन कई लोगों में से थे जिन्हें 1975 में आपातकाल के दौरान गिरफ्तार किया गया था। 1977 में आपातकाल हटने के बाद जेल से रिहा होने के बाद येचुरी जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए। येचुरी पहली बार 2005 में पश्चिम बंगाल से राज्यसभा के लिए चुने गए थे। राज्यसभा के सदस्य के रूप में उनका वर्तमान कार्यकाल 19 अगस्त 2011 से 18 अगस्त 2017 तक रहा। 19 अप्रैल 2015 को विशाखापत्तनम में आयोजित पार्टी कांग्रेस में सर्वसम्मति से उन्हें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पांचवें महासचिव के रूप में चुना गया था। उन्होंने प्रकाश करात का स्थान लिया।
राहुल और ममता ने जताया दुख
सीताराम येचुरी के निधन पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा, सीताराम येचुरी को भारत की गहरी समझ थी और वे भारत की विचारधारा के रक्षक थे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी येचुरी के निधन पर दुख जताया है। उन्होंने कहा है कि उनका निधन देश की राजनीति को बड़ा नुकसान है।



