चलो Sileme एप ही सही, चीन में कोई पूछने वाला तो है-जिंदा हो या नहीं, मर तो नहीं गए

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-डॉ.प्रकाश हिन्दुस्तानी, वरिष्ठ पत्रकार

चीन के लोग जो न करें, कम है! कोई भी चीज उठाकर उसका धंधा चालू कर देते हैं। अब देखिए, चीन में आजकल एक ऍप भयंकर लोकप्रिय हो रहा है – नाम है Sileme यानी Are You Dead? ये ऐप सीधे पूछता है – मर गया क्या? जिंदा है कि नहीं?

एप का बेसिक आइडिया कि उसके यूजर को हर 2 दिन में एक बड़ी बटन पर क्लिक करके कन्फर्म करना होता है कि वो जिंदा हैं। अगर 48 घंटे तक ‘चेक-इन’ नहीं किया, तो ऐप ऑटोमेटिकली चुने हुए इमरजेंसी कॉन्टैक्ट को अलर्ट भेज देता है कि कुछ गड़बड़ हो सकती है।

अभी ये एप्पल ऍप स्टोर में चीन में सबसे ज्यादा डाउनलोड होनेवाला एप है। नंबर 1 पर , पहले फ़ोकट में था, अब पेड हो गया है। यूएस, सिंगापोर, हांग कांग, आस्ट्रेलिया में रहने वाले अकेले चीनियों में टॉप रैंकिंग में है, ओवरसीज चाइनीज यूजर्स की वजह से। ये इतना वायरल है कि सोशल मीडिया पर ढेर सारे डिस्कशन, वीडियो और मीम्स चल रहे हैं। लॉन्च तो मई 2025 में हुआ था, लेकिन जनवरी 2026 में अचानक डाउनलोड्स में भयंकर उछाल आया।

ये खासतौर पर उन युवाओं के लिए बनाया गया है जो बड़े शहरों में अकेले रहते हैं, और उन्हें डर है कि अगर कोई हादसा हुआ, मर – मुरा गए तो कोई नोटिस नहीं करेगा – बॉडी कई दिनों/हफ्तों तक पड़ी रह सकती है। ये एप एक सेफ्टी कम्पेनियन के तौर पर मार्केट किया जाता है स्टूडेंट्स, ऑफिस वर्कर्स, या जो सोलो लाइफस्टाइल चुनते हैं, उनके लिए ।

ये एप चीन के बढ़ते अकेलेपन और अर्बन लाइफ की रियलिटी को दिखाता है। नाम डार्क है, लेकिन जरूरत बहुत रियल है। चीन में अगले पांच साल में 20 करोड़ लोग अकेले रहनेवाले हो जाएंगे ! एप सुपर सिंपल है। मोबाइल में एक खोपड़ी जैसा बटन हर 48 घंटे में चमकता है, बस उसे क्लिक कर दो।

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दुनिया में ऐसे Dead man’s switch या Inactivity check-in वाले एप कई हैं, लेकिन ये इतने वायरल और सिंपल तरीके से नहीं। चीन में ही बुजुर्गों के लिए कई गवर्नमेंट/प्राइवेट सर्विसेज हैं, लेकिन युवाओं के लिए ये नया ट्रेंड सेट कर रहा है।

कुछ एप जैसे Safe365, BuddyGuard, या CheckInलोकेशन या एक्टिविटी ट्रैक करते हैं। जापान में kodokushi (अकेले मौत) की समस्या के कारण ऐसे फीचर्स वाले एप्स/सर्विसेज हैं। Apple के Messages में Check In फीचर है (ट्रैवल के दौरान), लेकिन रेगुलर लाइफ के लिए नहीं। वेस्टर्न ऐप्स में emergency contact alerts वाले हैं, लेकिन चीन वाला ये नाम और टाइमिंग (हर 2 दिन) की वजह से यूनिक और डायरेक्ट है।

चीन में मौत वाला नाम अशुभ माना जाता है – लोग कह रहे -भाई नाम बदलो, ‘Are You Alive?’ (Huo-zhe-me) कर दो!” टीम ने सुना – ग्लोबल वर्जन का नाम Demumu कर दिया (जल्द domestic भी बदल सकता है)।

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जापान में ख़ुदकुशी से मिलता-जुलता एक शब्द है – Kodokushi जिसका मतलब है lonely death या solitary death – यानी ऐसी मौत जहां कोई व्यक्ति अकेले (अक्सर घर में) मर जाता है, और उसकी लाश कई दिनों, हफ्तों या कभी-कभी महीनों/सालों तक किसी को पता नहीं चलता। ये फेनोमेनन जापान में 1970-80 के दशक से चर्चा में आया, लेकिन 2000 के बाद बहुत तेजी से बढ़ा है। ये सिर्फ एक व्यक्तिगत ट्रेजडी नहीं, बल्कि जापान की पूरी सोसाइटी में हो रहे बड़े बदलावों का संकेत है।

जापान दुनिया का सबसे ज्यादा बुजुर्गों का देश है। आबादी का लगभग 30% 65+ उम्र का है। लाइफ एक्सपेक्टेंसी बहुत हाई (84 साल), लेकिन बर्थ रेट बहुत कम (~1.1 से 1.3) है। वहां पहले जॉइंट फैमिली में बुजुर्ग रहते थे, अब ज्यादातर एक व्यक्ति वाले घर में रहते हैं। कई बुजुर्ग बच्चे/रिश्तेदारों से कट जाते हैं। जापानी कल्चर में लोग मदद मांगने से हिचकते हैं। पड़ोसियों से कम बातचीत, सोशल लाइफ कम। जापान में भी गरीबी है, कम पेंशन है, नौकरियां जा रही हैं।

पहले सिर्फ बुजुर्ग उपेक्षित थे, अब युवा भी शामिल हो रहे हैं। अकेले रहते हैं। कोई चेक नहीं करता। 2024 में ~76,000 लोग घर पर अकेले में दिवंगत हो गए और उनके बारे में लोगों को कई दिन / हफ्ते बाद पता चला।

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भारत में भी हालात बहुत अच्छे नहीं हैं, यहाँ भी महानगरों में एकाकी रहनेवाले बढ़ते हैं, लेकिन हमारी सामाजिक व्यवस्था और दूसरों के मामलों में टांग अड़ाने की वाइरल आदत के कारण कभी कभार ही ऐसे प्रकरण सामने आते हैं।

हमारे यहां आम तौर पर मौत के बाद बहुत ज्यादा रस्में, रीति-रिवाज हैं। कई लोग तो अंतिम संस्कार और उठावने / बैठक में जनसंपर्क के लिए जाते हैं। मृतक की तारीफ में कसीदे के बहाने अपनी महानता बताते हैं। कई कवि मौत पर प्यारी कविताएं लिखते हैं, मर्सिया पढ़ा जाता है।

सन 1971 में आई आनंद फिल्म में अमिताभ बच्चन के किरदार डॉ. भास्कर बैनर्जी ने गुलज़ार की कविता पढ़ी थी, जो फिल्म के मुख्य पात्र राजेश खन्ना यानी आनंद के अंतिम क्षणों से जुड़ी हुई है :

मौत तू एक कविता है

मुझसे एक कविता का वादा है मिलेगी मुझको

डूबती नब्ज़ों में जब दर्द को नींद आने लगे

ज़र्द सा चेहरा लिये जब चाँद उफक तक पहुँचे

दिन अभी पानी में हो, रात किनारे के करीब

ना अंधेरा ना उजाला हो, ना अभी रात ना दिन

जिस्म जब ख़त्म हो और रूह को जब साँस आए

मुझसे एक कविता का वादा है मिलेगी मुझको

यह कविता मौत को डरावना नहीं, बल्कि एक सुंदर, शांत और काव्यात्मक अनुभव के रूप में दर्शाती है – ठीक वैसे ही जैसे फिल्म का मुख्य संदेश है : ज़िंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं।

वाह गुलज़ार ! आह चीनी भिया !!

Ardhendu Bhushan
Ardhendu Bhushanhttp://www.hbtvnews.com
Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

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