नई दिल्ली। पूर्व न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से जुड़े कैशकांड में जांच समिति की रिपोर्ट बुधवार को लोकसभा में पेश की गई। तीन सदस्यीय न्यायाधीश जांच समिति ने अपनी जांच में उनके खिलाफ लगाए गए गंभीर कदाचार के आरोपों को साबित माना है। समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि उनके सरकारी आवास के परिसर में बड़ी मात्रा में जले और अधजले नोटों का मिलना महज संयोग नहीं था और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपों में पर्याप्त दम पाया गया।
मामला मार्च 2025 का है, जब दिल्ली स्थित तत्कालीन न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर आग लगने के बाद दमकलकर्मियों को स्टोर रूम में जले हुए और अधजले नोट मिले थे। इस घटना के बाद न्यायपालिका में गंभीर सवाल उठे और तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश द्वारा गठित इन-हाउस कमेटी ने भी मामले की जांच की थी।
कोई संतोषजनकर उत्तर नहीं मिला
जांच में समिति ने पाया कि स्टोर रूम में रखी गई नकदी के संबंध में न्यायमूर्ति वर्मा की ओर से कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। समिति ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, तस्वीरों और वीडियो सहित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का परीक्षण किया। रिपोर्ट के मुताबिक, इन साक्ष्यों से स्टोर रूम में जली हुई नकदी की मौजूदगी स्थापित हुई। समिति ने यह भी माना कि नकदी का स्रोत स्पष्ट नहीं किया जा सका। रिपोर्ट में कहा गया कि न्यायमूर्ति वर्मा की ओर से नकदी को वहां रखे जाने या उसे किसी साजिश के तहत प्लांट किए जाने की दलील को साबित करने के लिए पर्याप्त सामग्री पेश नहीं की गई। समिति ने इस पूरे मामले को न्यायिक पद की गरिमा और सार्वजनिक विश्वास से जुड़ा गंभीर विषय माना।
घर पर भारी मात्रा में मिला था कैश
जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर भारी मात्रा में कैश मिला था। उस समय जस्टिस वर्मा घर पर नहीं थे और उनके घर पर आग लग गई थी। आग बुझाने आई फायर ब्रिगेड की टीम को उनके घर से 500-500 रुपये के नोटों से भरे बोरे मिले थे। इसके बाद जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाई कोर्ट में कर दिया गया था।
तीन सदस्यों की बनी थी कमेटी
जस्टिस वर्मा के घर पर मिले कैश की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यों की कमेटी बनाई थी। 200 से ज्यादा सांसदों ने भी जस्टिस वर्मा को पद से हटाने के लिए महाभियोग लाने की मांग की थी। इसी बीच अप्रैल 2026 में जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा दे दिया, लेकिन उनका इस्तीफा अभी तक मंजूर नहीं हुआ है।
जस्टिस वर्मा पर तीनों आरोप साबित
– राजधानी दिल्ली के 30, तुगलक क्रेसेंट के आधिकारिक आवास के स्टोररूम से 500 रुपये के नोटों के बंडल बरामद बरामद हुए थे। कमेटी के मुताबिक, जस्टिस वर्मा नकदी की मौजूदगी, स्रोत और स्वामित्व को लेकर संतोषजनक सफाई नहीं दे सके। कमेटी ने इस आरोप को सही माना।
– कमेटी ने पाया कि मामले से जुड़े सबूतों को उचित तरीके से सुरक्षित और संरक्षित नहीं रखा गया। कानूनी सीलिंग और निरीक्षण से पहले स्टोररूम की स्थिति में बदलाव किए जाने की बात सामने आई है। बाद में कुछ करेंसी नोटों के गायब या अनुपलब्ध होने का भी स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं मिला। कमेटी ने इसे सबूतों के संरक्षण में गंभीर लापरवाही और विफलता माना।
– कमेटी ने जज की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण, खासकर 22 मार्च 2025 के जवाब, को संतोषजनक नहीं माना। कमेटी के अनुसार, उनका रुख टालमटोल वाला रहा और वह संस्थागत जिम्मेदारी और अपेक्षित स्पष्टता के अनुरूप नहीं था। स्वतंत्र आधिकारिक गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह आरोप भी सिद्ध पाया गया।



