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इंदौर। मध्यप्रदेश में भाजपा ने काफी मशक्कत के बाद अब तक 56 जिलों के अध्यक्षों की घोषणा कर दी है, लेकिन इंदौर का पेंच अभी भी उलझा हुआ है। हर हाल में जिला एवं नगर के दोनों पदों पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का गुट कब्जा करना चाहता है, इसीलिए यह मामला सुलझ नहीं पा रहा। गुरुवार को जिले का नाम लगभग तय हो गया था और नगर को लेकर खींचतान जारी थी, लेकिन अब कहा जा रहा है कि ‘चाचा चौधरी’ ने अपने परम शिष्य ‘साबू’ का नाम आगे बढ़ा दिया है।
उल्लेखनीय है कि दो नंबर खेमे से पहले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नगर अध्यक्ष के लिए दीपक जैन टीनू का नाम आगे बढ़ाया था, लेकिन अपने ही गुट के नेताओं के जबरदस्त विरोध के बाद सुमित मिश्रा के लिए अड़ गए। विधायक रमेश मेंदोला सहित कई अन्य नेता भी मिश्रा के नाम पर राजी हैं। सूत्र बताते हैं कि दो नंबर खेमे ने ही अब मामला ज्यादा उलझता देख पूर्व विधायक जीतू जिराती का नाम आगे कर दिया है। गुरुवार को प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा से जीतू जिराती की मुलाकात और बात भी करा दी गई है। यह भी बताया जा रहा है कि जिराती पहले प्रदेश संगठन छोड़कर इंदौर आने को राजी नहीं थे, लेकिन उन्हें मना लिया गया है। दरअसल मंत्री खेमा चाहता है कि टीनू जैन और सुमित मिश्रा को लेकर अपने ही नेताओं में चल रही नाराजगी को दूर करने का सबसे अच्छा उपाय जिराती को अध्यक्ष बनाना होगा। वैसे भी जिराती राऊ विधानसभा के लिए फिर से कोशिश में लगे ही हैं, ऐसे में नगर अध्यक्ष का पद उनके लिए और सहायक होगा।
जिले और नगर दोनों एक साथ होंगे घोषित
मंत्री गुट हर हाल में जिला और नगर दोनों ही पदों पर कब्जा चाहता है। इसके लिए ही दिल्ली तक वरिष्ठ नेताओं तक बात पहुंचाई गई। चूंकि जिले में दूसरे मंत्री तुलसी सिलावट और अन्य विधायक मामला उलझा रहे थे, इसलिए वीटो पावर लगाने की कोशिश भी हुई। बताया जाता है कि जिले का मामला लगभग तय है, लेकिन मंत्री गुट इस बात पर अड़ा हुआ है कि दोनों के नाम की घोषणा एक साथ हो। मंत्री गुट चाहता है कि अगर किसी कारण से जिले का मामला बिगड़ जाए तो नगर में संभाल लिया जाए, इसलिए एक साथ नाम घोषित होना जरूरी है।
एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश
जीतू जिराती का नाम बढ़ाकर मंत्री गुट एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश कर रहा है। वैसे जिराती हैं तो मंत्री खेमे के ही, लेकिन विभिन्न पदों पर रहने के अनुभव के कारण वे सबको साधने की ताकत रखते हैं। सब से बनाकर चलने की आदत के कारण ही दूसरे खेमे के विधायक और नेता भी उनका खुलकर विरोध नहीं करते। वर्तमान में जो भी नाम चल रहे हैं, उनसे अनुभवी होने के कारण दो नंबर खेमे में भी टीनू या मिश्रा की तरह जिराती का विरोध नहीं होगा। मंत्री गुट ने इसीलिए काफी सोच-समझकर जिराती का नाम आगे बढ़ाया है। अब अगर नया कोई पेंच न फंसा तो ‘चाचा चौधरी’ और ‘साबू’ की जोड़ी फिर से इंदौर में दिखाई देगी।



