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मध्यप्रदेश के सर्वशक्तिमान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एक कार्यक्रम में कहा कि इंदौर के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूं। इंदौर के लिए मैं किसी से भी झगड़ लेता हूं, चाहे मुख्यमंत्री हो या कोई बड़ा मंत्री। मुझे झगड़ने में कोई तकलीफ नहीं होती है। मंत्रीजी आपने सही कहा है कि आप किसी से भी झगड़ लेते हैं, लेकिन इसमें एक झूठ यह है कि आप इंदौर के लिए कभी नहीं लड़े।
जरा डॉ.उमाशशि शर्मा के महापौर कार्यकाल को याद कर लेते हैं। तब महापौर परिषद में शामिल आपके खास समर्थक महापौर के घर पर बैठक में कांच की टेबल पर लात मार कर चले आते थे। महापौर परिषद की बैठकों और परिषद सम्मेलनों से लगातार गायब रहते थे और तत्कालीन महापौर के हर काम में अड़ंगा लगाना उनका काम था। पूरे शहर को पता है कि यह सबकुछ आपकी बिना सहमति के संभव नहीं था। तब आप यह कहा करते थे –नगर निगम की तरफ पांव करके भी नहीं सोता।
इसके बाद जब कृष्णमुरारी मोघे महापौर बने तो आपने नगर निगम के एक कार्यक्रम में ठाकुर के हाथ वाली बात कही थी। मोघेजी जैसे वरिष्ठ नेता को आपका कितना सहयोग मिला सबको पता है। लगातार आठ बार की सांसद रहीं पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन को आपने इंदौर हित में कितना सहयोग किया, यह पूरे शहर ही नहीं पूरी भाजपा को पता है। तब ताई और भाई गुट पूरे देश में चर्चा में था।
मंत्रीजी, लोग कहा करते हैं कि जब दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे और आप महापौर तो आप दोनों की जमकर घुटती थी। इतनी घुटती थी कि आपके किसी भी प्रोजेक्ट में दिग्विजय सिंह ने कभी टांग नहीं फंसाई। इसके बाद भाजपा की सरकार बनी और उमा भारती सीएम बनीं। तब तक सब ठीक था, लेकिन इसके बाद के किसी भी मुख्यमंत्री से आपकी बनी हो ऐसी जानकारी इंदौर के लोगों को नहीं है।
मंत्रीजी, यह बात किसी से छुपी नहीं है कि आप जब भी लड़े अपने हित के लिए लड़े, अपनी महत्वाकांक्षा के लिए लड़े और अपना साम्राज्य बचाने के लिए लड़े। इंदौर के हित की इतनी ही चिन्ता होती तो हर सीएम की तरह हर महापौर का विरोध आप क्यों करते? जरा दिल पर हाथ रख कर सोचिएगा-आपकी लड़ाई में शहर को कब, कितना नुकसान हुआ है।



