बांधवगढ़ रिजर्व में गौर का कुनबा बढ़ा है, जबकि कान्हा में वन भैंसे को पुनः बसाया गया है। यह दोनों वन्यजीव संरक्षण के महत्वपूर्ण प्रयास मध्य प्रदेश के प्रमुख टाइगर रिजर्वों में सफल साबित हो रहे हैं।
बांधवढ़ में गौर की संख्या बढ़ने के प्रयास
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गौर की संख्या अब लगभग 220 से 240 तक पहुँच गई है। वर्ष 1998 में विलुप्त हो चुके गौरों को पुनर्स्थापित करने के लिए 2011-12 में कान्हा से 50 गौर लाए गए थे। इसके बाद सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से 50 अतिरिक्त गौर लाए गए, जिनमें से 23 फरवरी 2025 में और 27 जनवरी 2026 में बांधवगढ़ लाए गए।
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इन गौरों पर वैज्ञानिक निगरानी के लिए वीएचएफ कॉलर, हॉर्न स्लीव और ईयर टैग लगाए गए हैं। यह कदम उनकी सुरक्षा और गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए महत्वपूर्ण है।

कान्हा में वन भैंसे की पुनर्स्थापना का सफर
कान्हा टाइगर रिजर्व में 45 वर्षों बाद वन भैंसे की वापसी हुई है। 1979 के बाद विलुप्त हो चुकी यह प्रजाति असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से लाकर पुनः बसाई गई है। अब तक कुल 8 वन भैंसे कान्हा में छोड़ी जा चुकी हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अप्रैल 2026 में कान्हा की सूपखार रेंज में वन भैंसों को 150 हेक्टेयर के सुरक्षित बाड़े में छोड़ा था, जो सॉफ्ट रिलीज प्रक्रिया के तहत किया गया।
गौर और वन भैंसा पारिस्थितिकी तंत्र के प्राकृतिक इंजीनियर
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, गौर और वन भैंसा घास के मैदानों को बनाए रखने और जंगल की जैव विविधता संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन्हें पारिस्थितिकी तंत्र के ‘प्राकृतिक इंजीनियर’ के रूप में जाना जाता है।
यह दोनों प्रजातियां जंगल के पर्यावरण को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती हैं, जिससे अन्य जीवों के लिए आवास और भोजन की उपलब्धता बनी रहती है।

पुनर्स्थापना प्रयासों की पृष्ठभूमि और महत्व
बांधवगढ़ और कान्हा टाइगर रिजर्व में इन शाकाहारी वन्यजीवों की पुनर्स्थापना से जैव विविधता में सुधार हुआ है। विलुप्त होने के बाद पुनः बसाने के ये प्रयास वन्यजीवन संरक्षण की दिशा में बड़ी सफलता हैं।
इसके अलावा, वन्यजीवों की संख्या बढ़ने से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा, जो पर्यावरणीय स्थिरता और पर्यटन के लिए भी लाभकारी होगा।
आम आदमी पर संरक्षण का प्रभाव
वन्यजीवों की संख्या में वृद्धि से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं, खासकर इकोटूरिज्म और गाइडिंग जैसे क्षेत्रों में। इसके साथ ही, पारिस्थितिक तंत्र के स्वस्थ होने से जल संरक्षण और खेती प्रभावित होती है, जो आम जनता के लिए भी फायदेमंद है।
इस प्रकार, वन्यजीव संरक्षण सीधे तौर पर क्षेत्र के आर्थिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।
आगे के कदम और चुनौतियां
इन प्रयासों को निरंतर बनाए रखना आवश्यक है। भविष्य में और अधिक गौर और वन भैंसे लाने तथा उनके आवास की सुरक्षा पर ध्यान देना होगा।
इसके अलावा, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए जागरूकता और उचित प्रबंधन आवश्यक होगा ताकि ये प्रजातियां सुरक्षित रूप से बढ़ सकें।



