भारत के सबसे बड़े SIR स्कैंडल ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। इस विवादित विषय पर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए तीन अहम मांगें रखी हैं। यह मामला विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसने मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव किए हैं।
अरविंद केजरीवाल ने SIR प्रक्रिया को सबसे बड़ा चुनावी स्कैंडल बताया
अरविंद केजरीवाल ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा चुनावी स्कैंडल करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के तहत लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। केजरीवाल का कहना है कि यह कार्रवाई चुनाव प्रणाली में गड़बड़ी और धोखाधड़ी को बढ़ावा देती है, जिससे लोकतंत्र की जड़ें कमजोर होती हैं।
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उनका यह भी दावा है कि SIR की वजह से मतदाता सूची में कई विसंगतियां और त्रुटियां आई हैं, जिन्हें अनदेखा किया जा रहा है। इस प्रक्रिया पर कई अन्य चुनाव आयुक्तों ने भी असहमति जताई है, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया गया है।

SIR प्रक्रिया को रद्द करने और पुरानी लिस्ट बहाल करने की मांग
केजरीवाल ने पहली मांग में SIR प्रक्रिया और फॉर्म 6 में किए गए सभी बदलावों को तत्काल निरस्त करने की बात कही है। उनके अनुसार, पिछले तीन वर्षों की पुरानी वोटर लिस्ट को फिर से बहाल किया जाना चाहिए। यह कदम मतदाता सूची की विश्वसनीयता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है।
वे मानते हैं कि SIR प्रक्रिया के कारण कई वैध मतदाताओं को वोटर सूची से हटाया गया है, जिससे उनकी मतदान की योग्यता प्रभावित हुई है। इस मांग के पीछे का उद्देश्य चुनाव प्रणाली में विश्वास बहाल करना है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और देशद्रोह का आरोप
अरविंद केजरीवाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस पूरे SIR विवाद का मास्टरमाइंड बताते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। वे चाहते हैं कि उन पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाया जाए।
केजरीवाल का तर्क है कि ज्ञानेश कुमार ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर अवैध बदलाव कर लोकतंत्र को कमजोर किया है। इसलिए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
पिछले राज्यों के चुनाव रद्द कर फिर से मतदान कराने की मांग
तीसरी मांग के तहत केजरीवाल ने उन राज्यों के चुनावों को रद्द करने की बात कही है, जहां पिछले 2-3 वर्षों में विधानसभा चुनाव हुए हैं। इन राज्यों में दिल्ली, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और हरियाणा शामिल हैं।
उनका दावा है कि SIR प्रक्रिया के कारण इन चुनावों की निष्पक्षता प्रभावित हुई है। इसलिए नए सिरे से निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की जरूरत है, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की साख बनी रहे।

चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने दर्ज की असहमति की नोटिस
केजरीवाल ने यह भी उजागर किया कि चुनाव आयोग के तीन सदस्यों में से दो अन्य आयुक्तों ने SIR प्रक्रिया पर 14 बार लिखित असहमति दर्ज कराई है। इसमें नाम हटाने, जोड़ने और चुनाव क्षेत्र अधिकारियों के अधिकार केंद्रित करने के फैसलों को लेकर विरोध शामिल है।
हालांकि, इन असहमति नोट्स को चुनाव आयोग ने अनदेखा कर दिया, जिससे इस विवाद में और बढ़ोतरी हुई है। यह तथ्य SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता और वैधता पर सवाल उठाता है।
केजरीवाल और परिवार को SIR नोटिस, दिल्ली में लाखों मतदाताओं को भी नोटिस जारी
इस विवाद के बीच दिल्ली चुनाव आयोग ने अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के चार सदस्यों को “Unmapped with Last SIR” श्रेणी में सत्यापन के लिए नोटिस जारी किया है। इसके अलावा, दिल्ली के करीब 31.63 लाख मतदाताओं को भी विसंगतियों के कारण नोटिस भेजे गए हैं।
इसमें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और भाजपा नेता वीरेंद्र सचदेवा भी शामिल हैं। इस कदम से मतदाताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है और SIR प्रक्रिया की आलोचना तेज हुई है।
सुप्रीम कोर्ट में SIR विवाद की सुनवाई और संभावित परिणाम
दिल्ली में भेजे गए मशीन-जनरेटेड नोटिसों के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुकी है। कोर्ट ने चुनाव आयोग से इन नोटिसों की तार्किकता और प्रक्रिया को लेकर कड़े सवाल पूछे हैं।
यह सुनवाई SIR विवाद की गंभीरता को दर्शाती है। कोर्ट के फैसले से भविष्य में चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वास की बहाली संभव है। वहीं, आम जनता के लिए यह प्रक्रिया और इसके परिणाम महत्वपूर्ण साबित होंगे।



