कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस संक्रमण की वजह से मादा बाघ शावक की मौत हो गई है। इस घटना के बाद कान्हा क्षेत्र में इस वायरस से प्रभावित और मृत बाघों की संख्या नौ पहुंच गई है।
मुक्की परिक्षेत्र में मादा बाघ शावक की मौत
मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की परिक्षेत्र स्थित वन्यजीव उपचार केंद्र में एक मादा बाघ शावक की इलाज के दौरान मौत हुई। वन गश्ती दल ने 26 अगस्त को इस शावक को कमजोर स्थिति में पाया था। इसके बाद 27 अगस्त से वन्यप्राणी चिकित्सकों की देखरेख में उसकी चिकित्सा शुरू की गई। हालांकि, इलाज के बावजूद शावक की रविवार को मृत्यु हो गई।
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कान्हा टाइगर रिजर्व के उप निदेशक पी. के. वर्मा ने इस मामले की पुष्टि की है और बताया कि शव का पोस्टमार्टम राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के मानक प्रोटोकॉल के तहत किया गया। जैविक नमूनों को जबलपुर लैब भेजा गया है ताकि मौत के कारणों की अंतिम पुष्टि हो सके।

कान्हा में CDV वायरस से अब तक नौ बाघ संक्रमित
इस मादा शावक की मौत के साथ कान्हा क्षेत्र में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के संक्रमण से मरने वाले बाघों और शावकों की संख्या नौ हो गई है। इस वायरस का पहला प्रकोप अप्रैल-मई में कान्हा के सरही और अमाही परिक्षेत्र में देखा गया था। उस समय बाघिन T-141 और उसके चार शावकों समेत पांच बाघों की मौत हुई थी।
CDV वायरस मुख्यतः संक्रमित घरेलू और आवारा कुत्तों के माध्यम से वन्यजीवों तक फैलता है। यह वायरस मांसाहारी जानवरों के लिए खतरनाक है और कान्हा में बाघ संरक्षण के लिए चुनौती बन चुका है।
बाघ शावक के रेस्क्यू और इलाज की प्रक्रिया
इस मादा बाघ शावक को वन गश्ती दल ने 26 अगस्त को अरौली गांव के पास कमजोर हालत में देखा था। वन विभाग की टीम ने अगले दिन शावक को खोजकर उपचार केंद्र में भर्ती कराया। वन्यप्राणी चिकित्सकों ने उसे लगातार निगरानी में रखा, लेकिन संक्रमण की गंभीरता के कारण उसकी जान नहीं बच सकी।
शावक की मौत के बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के निर्देशानुसार शव का उचित दाह संस्कार किया गया। मृत शरीर से लिए गए नमूनों की जांच अभी जारी है।

CDV वायरस का स्रोत और वन्यजीवों पर प्रभाव
कैनाइन डिस्टेंपर वायरस एक संक्रामक रोग है जो मुख्य रूप से कुत्तों से फैलता है। कान्हा टाइगर रिजर्व में आवारा और पालतू कुत्तों से यह वायरस बाघों और अन्य मांसाहारी प्रजातियों में पहुंच रहा है।
इस संक्रमण का वन्यजीवों के स्वास्थ्य और संरक्षण पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। बाघों के मरने से जैव विविधता प्रभावित होती है और पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो सकता है। इसलिए वन विभाग और संरक्षण प्राधिकरण इस वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कड़ी निगरानी और उपचार कर रहे हैं।
पहले के मामलों का संक्षिप्त विवरण
इस साल अप्रैल से जून के बीच कान्हा के सरही, अमाही और मुक्की परिक्षेत्रों में CDV संक्रमण से आठ बाघों की मौत हुई थी। इनमें अमाही बाघिन और उसके चार शावक भी शामिल हैं। इस संक्रमण ने क्षेत्र के बाघों की संख्या पर प्रतिकूल असर डाला है।
वन विभाग ने संक्रमण से लड़ने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें संक्रमित जानवरों का रेस्क्यू, उपचार और मृतकों के पोस्टमार्टम शामिल हैं। इसके साथ ही स्थानीय समुदायों में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास भी जारी है।
कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघ संरक्षण के लिए चुनौतियां
कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के कारण बाघों की बढ़ती मौतें संरक्षण प्रयासों के लिए गंभीर चुनौती हैं। वन विभाग को आवारा कुत्तों के नियंत्रण और वायरस के प्रसार को रोकने पर विशेष ध्यान देना होगा।
इसके अलावा, वन्यजीव उपचार केंद्रों में संसाधनों को मजबूत करना और क्षेत्रीय निगरानी बढ़ाना आवश्यक है ताकि भविष्य में इस प्रकार के प्रकोपों को रोका जा सके। बाघों के संरक्षण के लिए व्यापक रणनीति की जरूरत है, जिसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी भी शामिल हो।



