नौरादेही में मध्य प्रदेश चीता प्रोजेक्ट ने एक महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है। 7 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों ‘व्योम’ और ‘नीरा’ को छोड़ा। यह कदम मध्य प्रदेश में चीतों के संरक्षण और पुनर्स्थापना के लिए एक नया अध्याय है।
नौरादेही में मध्य प्रदेश चीता प्रोजेक्ट के तहत तीसरा चीता आवास बना
मध्य प्रदेश का नौरादेही क्षेत्र अब देश में चीतों का तीसरा प्रमुख आवास बन गया है। कूनो नेशनल पार्क और गांधी सागर अभयारण्य के बाद यह तीसरा ठिकाना है, जहां चीतों को सुरक्षित और प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया है। यह क्षेत्र वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आता है और इसकी कुल भूमि 2339 वर्ग किलोमीटर है।
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यहां विशेष सुरक्षा बाड़े तैयार किए गए हैं, जिनका क्षेत्रफल लगभग 439 हेक्टेयर है। ये आधुनिक बाड़े चीतों को नए पर्यावरण में अनुकूलित करने में मदद करते हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।

‘व्योम’ और ‘नीरा’ की नौरादेही में वापसी
मध्य प्रदेश चीता प्रोजेक्ट के तहत छोड़े गए दो चीतों में नर ‘व्योम’ और मादा ‘नीरा’ शामिल हैं। ‘व्योम’ का पूर्व नाम थोलो था और इसे बोत्सवाना से लाया गया था। वहीं, ‘नीरा’ का पूर्व नाम CCB-3 था। दोनों चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान से नौरादेही लाया गया है।
इन चीतों की नौरादेही में वापसी से बुंदेलखंड के जंगलों में करीब 114 वर्षों के बाद चीतों की पुनः मौजूदगी हुई है। यह वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मध्य प्रदेश चीता प्रोजेक्ट का इतिहास और वर्तमान स्थिति
मध्य प्रदेश में चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में हुई थी। इसके बाद से प्रदेश में चीतों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। वर्तमान में मध्य प्रदेश में चीतों की कुल संख्या 60 तक पहुंच चुकी है। इसमें से 41 चीतों का जन्म भारत में हुआ है।
इस परियोजना के तहत न केवल चीतों की संख्या बढ़ रही है, बल्कि उनके संरक्षण के लिए वन विभाग और अन्य एजेंसियां भी सक्रिय हैं। वनकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण देकर चीतों की निगरानी और देखभाल में सुधार किया गया है।

नौरादेही में चीता संरक्षण के लिए विशेष तैयारी
चीतों की सुरक्षा और अनुकूलन के लिए नौरादेही में क्वारंटाइन और सॉफ्ट रिलीज बाड़े बनाए गए हैं। पहले चरण में चीतों को छोटे क्वारंटाइन बाड़े में रखा जाता है, जहां उनका स्वास्थ्य और व्यवहार जांचा जाता है। इसके बाद उन्हें बड़े सॉफ्ट रिलीज बाड़ों में छोड़ा जाता है, जो लगभग 80 से 100 हेक्टेयर क्षेत्रफल के होते हैं।
वन विभाग ने इस काम के लिए लगभग 100 वनकर्मियों को प्रशिक्षित किया है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि चीतों को नए वातावरण में सुरक्षित और सहज रूप से ढलने का अवसर मिले।
बुंदेलखंड में वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय लोगों का विकास
मध्य प्रदेश सरकार वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों के आर्थिक विकास पर भी ध्यान दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि अभयारण्यों में पर्यटन से होने वाली आमदनी का बड़ा हिस्सा आसपास के ग्रामीणों को दिया जा रहा है।
सरकार होम स्टे के लिए ग्रामीणों को वित्तीय सहायता भी प्रदान कर रही है, जिससे वे पर्यटकों को ठहरने की सुविधा दे सकें। इससे वन क्षेत्र और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
मध्य प्रदेश चीता प्रोजेक्ट का भविष्य और विस्तार
नौरादेही में इस वर्ष दो चीतों को छोड़े जाने के बाद नवंबर 2026 में यहां दो और चीतों को लाने की योजना है। इससे मध्य प्रदेश में चीतों की संख्या और बढ़ेगी।
इसके अलावा, प्रदेश के अन्य वन क्षेत्रों में भी चीता संरक्षण और पुनर्स्थापना को विस्तार देने की तैयारी है। यह परियोजना बुंदेलखंड के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के साथ ही वन्यजीव पर्यटन को भी बढ़ावा देगी।



