मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में 1,000 से अधिक महिलाओं ने मिलकर एक अनोखा मानव रंगोली प्रदर्शन करते हुए चीता मुखी की आकृति बनाई। इस आयोजन में महिलाओं द्वारा बनाई गई यह विशाल चीता मुखी की आकृति आसमान से देखने पर बेहद प्रभावशाली और अद्भुत नजारा प्रस्तुत कर रही थी।
श्योपुर में 1,000 महिलाओं ने बनाई चीता मुखी की आकृति
श्योपुर जिले के ढेंगदा क्रीड़ा परिसर में आयोजित इस समारोह का प्रमुख आकर्षण 1,000 महिलाओं और छात्राओं का सामूहिक प्रयास था, जिन्होंने अपने शरीर के संयोजन से चीता मुखी की विशाल आकृति तैयार की। सेवा संकल्प अभियान के तहत यह आयोजन प्रोजेक्ट चीता के चार वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया गया। यह मानव रंगोली वन्यजीव संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रभावशाली माध्यम साबित हुआ।
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चीता मुखी की आकृति का महत्व और संदेश
यह मानव रंगोली खास इसलिए थी क्योंकि इसने भारत में जन्मी पहली मादा चीता ‘मुखी’ के चेहरे को दर्शाया। मुखी ने हाल ही में पांच शावकों को जन्म देकर प्रोजेक्ट चीता में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। इस प्रकार की आकृति बनाकर महिलाओं ने वन्यजीव संरक्षण के महत्व को उजागर किया और प्रकृति के प्रति जागरूकता फैलाने का काम किया।
प्रोजेक्ट चीता की सफलता का उत्सव
प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूरे होने पर यह आयोजन विशेष रूप से वन्यजीव संरक्षण की उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए आयोजित किया गया था। इस अभियान की सफलता में मुखी की भूमिका अहम है, जो कूनो नेशनल पार्क में जन्मी पहली मादा चीता है। पांच शावकों के जन्म ने इस परियोजना को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने किया आयोजन की सराहना
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस आयोजन की खुले दिल से सराहना की। उन्होंने कहा कि ‘चीता स्टेट’ मध्य प्रदेश में नारी शक्ति द्वारा इस तरह की पहल वन्यजीव संरक्षण और जनभागीदारी का प्रतीक है। उन्होंने इस कार्यक्रम को प्रेरणादायक और वन्यजीवों के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया।
कार्यक्रम में सहभागिता और स्थानीय प्रशासन की भूमिका
इस आयोजन में महिला एवं बाल विकास विभाग और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़ी हजारों महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। स्थानीय प्रशासन ने भी इस कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शरदीय नवरात्र के पावन अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
वन्यजीव संरक्षण के लिए इस प्रकार की पहल का भविष्य पर प्रभाव
वन्यजीव संरक्षण को लेकर इस तरह की जागरूकता अभियान आम जनता के मन में जिम्मेदारी का भाव पैदा करते हैं। इस मानव रंगोली ने न केवल वन्यजीवों के प्रति लगाव बढ़ाया बल्कि कूनो नेशनल पार्क की वैश्विक पहचान को भी मजबूत किया। आने वाले समय में इस तरह के आयोजन वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को और भी प्रभावी बनाएंगे।



