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राहुल गांधी के वोट चोरी दावे पर चुनाव आयोग का जवाब, प्रक्रिया और तथ्य स्पष्ट किए
भारत के चुनाव आयोग ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ संबंधी दावों का तथ्यात्मक जवाब दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि कानून में निर्धारित उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी भी मतदाता का नाम अंतिम मतदाता सूची से हटाया नहीं जा सकता।

चुनाव आयोग ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि मतदाता सूचियां कानून के अनुसार तैयार होती हैं और इनमें नाम जोड़ने, काटने या सुधारने का कार्य केवल निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही संभव है। कोई भी व्यक्ति इस प्रक्रिया को दरकिनार कर मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए दबाव नहीं बना सकता।
आयोग के अनुसार, निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) कुछ मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर जांच कर सकता है, लेकिन केवल प्रिंट, टीवी या सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों के आधार पर बिना ठोस सबूत के हजारों नोटिस जारी नहीं किए जा सकते, जिससे योग्य मतदाताओं को अनावश्यक परेशानियां झेलनी पड़ें।

मतदाता पंजीकरण नियम के तहत, अगर कोई व्यक्ति जो संबंधित विधानसभा क्षेत्र का मतदाता नहीं है किसी नाम के गलत तरीके से शामिल होने का आरोप लगाता है, तो उसे ERO के पास शपथ-पत्र और सबूत के साथ आवेदन करना होगा। यह नियम विधानसभा क्षेत्र के बाहर से वोट काटने की मंशा रखने वालों से मतदाताओं की सुरक्षा करता है।
यह बयान उस समय आया है जब राहुल गांधी ने 2024 लोकसभा चुनाव में ‘वोट चोरी’ होने का आरोप लगाते हुए साफ-सुथरी मतदाता सूची की मांग की थी। आयोग ने राहुल गांधी के ‘मकान नंबर जीरो’ संबंधी दावे को भी गलत बताया और एक वीडियो जारी किया, जिसमें बेंगलुरु के भोगनहल्ली के निवासी बता रहे हैं कि वे 15 साल से अधिक समय से उन मकानों में रह रहे हैं, जिन्हें राहुल गांधी ने ‘काल्पनिक’ बताया था।



