
बालाघाट। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी गुरुवार को बालाघाट पहुंचे। उन्होंने आदिवासी बहुल क्षेत्र के जगला गांव में उन परिवारों से मुलाकात की, जिन्होंने बीमारी के दौरान अपने बच्चों को खोया है। राहुल गांधी ने परिवारों से उनकी समस्याएं सुनीं और क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में स्वास्थ्य, शिक्षा और आदिवासी परिवारों की स्थिति को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने कहा कि आदिवासी इलाकों में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चों के बीमार होने के बाद भी उन्हें समय पर पर्याप्त इलाज नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने मृत बच्चों के परिवारों को मुआवजा और सहायता उपलब्ध कराने का मुद्दा भी उठाया।
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स्वास्थ्य और शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात
राहुल गांधी ने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा दो ऐसे क्षेत्र हैं, जिन पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शिक्षा और परिवारों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष फोकस किया जाएगा।
सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल
राहुल गांधी ने सरकारी योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि योजनाओं के प्रचार और ब्रांडिंग के बावजूद उनका वास्तविक लाभ जरूरतमंद आदिवासी परिवारों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि योजनाओं का लाभ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि गांवों में रहने वाले लोगों तक पहुंचे।
स्कूल पहुंचकर बच्चों से की बातचीत
बालाघाट दौरे के दौरान राहुल गांधी ने एक सरकारी स्कूल में भी रुककर बच्चों से बातचीत की। उन्होंने स्कूल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और बच्चों से पढ़ाई तथा उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। इसके बाद वे जगला गांव पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात की।
आदिवासी परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा भी उठाया
राहुल गांधी ने आदिवासी परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने विकास परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा और पुनर्वास दिए जाने की जरूरत बताई। राहुल गांधी ने कहा कि आदिवासी परिवारों की समस्याओं को सामने लाना और उनकी आवाज उठाना उनकी जिम्मेदारी है।
बच्चों की मौत के आंकड़ों पर अलग-अलग दावे
बालाघाट के आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों की मौत का मामला राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। उपलब्ध रिपोर्टों में मौतों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। सरकारी आंकड़ों में 34 बच्चों की मौत का उल्लेख किया गया है, जबकि कांग्रेस की ओर से इससे अधिक मौतों का दावा किया गया है। मौतों के कारणों को लेकर भी अलग-अलग स्वास्थ्य संबंधी कारण सामने आए हैं। इनमें मलेरिया, खसरा, कुपोषण और अन्य बीमारियों का उल्लेख किया गया है। ऐसे में जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने आने तक किसी एक बीमारी को सभी मौतों का एकमात्र कारण मानना उचित नहीं होगा।



