भारतीय शेयर बाजार में 25 साल में पहली बार लगातार 8वें हफ्ते गिरावट दर्ज हुई है। इस ऐतिहासिक घटना ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है और बाजार की समग्र स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निफ्टी 50 इंडेक्स इस अवधि में लगातार नीचे की ओर रहा, जो कि पिछले दो दशकों में पहली बार हो रहा है।
निफ्टी 50 की लगातार गिरावट का रिकॉर्ड
निफ्टी 50 इंडेक्स ने जनवरी 2026 के अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर 26,373 से लगभग 15% की गिरावट देखी है। पिछले आठ हफ्तों में यह इंडेक्स लगभग 2,000 अंकों से अधिक गिर चुका है, जो लगभग 8.5% की भारी गिरावट है। यह 2001 के डॉट-कॉम क्रैश के बाद सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट है, जब बाजार नौ हफ्ते तक लगातार गिरा था।
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1 अक्टूबर 2026 को भी बाजार में बड़ी बिकवाली देखी गई। बीएसई सेंसेक्स लगभग 1,000 अंक टूटकर 71,600 के नीचे आ गया और निफ्टी 50 300 अंकों से अधिक फिसलकर 22,300 के नीचे पहुंच गया।

विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली का प्रभाव
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने इस मंदी में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने 2026 के कैलेंडर वर्ष में भारतीय शेयर बाजार से रिकॉर्ड 27.8 बिलियन डॉलर (करीब 2.6 लाख करोड़ रुपये) की निकासी की है। यह बिकवाली बाजार की गिरावट का प्रमुख कारण बनी है।
विदेशी निवेशकों की निकासी से बाजार की धारणा कमजोर हुई है और निवेशकों में असमंजस बढ़ा है। इससे मार्केट कैपिटलाइजेशन में भी भारी कमी आई है।
मार्केट कैपिटल में भारी गिरावट
निवेशकों को इस गिरावट के कारण बड़ा नुकसान हुआ है। भारत के शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर 463 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया है। केवल 1 अक्टूबर 2026 के दिन ही निवेशकों के लगभग 9 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए।
यह बाजार की व्यापक कमजोरी का संकेत देता है, जो सिर्फ कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं है।
वैश्विक आर्थिक कारक और बाजार पर प्रभाव
मंदी के पीछे वैश्विक कारण भी महत्वपूर्ण हैं। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड 5.3% तक पहुंच गया है। इसके कारण विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी डॉलर परिसंपत्तियों में निवेश कर रहे हैं।
इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होकर 96 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया है। यह भी भारतीय शेयर बाजार की गिरावट को बढ़ावा दे रहा है।
तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव का असर
पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार की धारणा पर दबाव डाल रही हैं। तेल की कीमतें पहले ही 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा चुकी हैं, जो आर्थिक वृद्धि को धीमा कर सकती हैं।
यह स्थिति निवेशकों की चिंता को और बढ़ा रही है और बाजार में बिकवाली को प्रोत्साहित कर रही है।
शेयर बाजार में व्यापक कमजोरी का संकेत
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के आंकड़ों के अनुसार, निफ्टी 500 इंडेक्स के लगभग 81% शेयर अपने 50-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज से नीचे कारोबार कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि बाजार में कमजोरी व्यापक है और चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं है।
इस व्यापक कमजोरी के चलते निवेशकों को सतर्क रहने और अपने पोर्टफोलियो का पुनर्मूल्यांकन करने की सलाह दी जा रही है।



