इंदौर। पार्षद जीतू यादव ने एमआईसी में वापसी के बाद अब काम का श्रीगणेश कर दिया है। बड़ी मुश्किल से मिली कुर्सी के बाद वे अनंत चतुर्दशी पर निकलने वाली झांकियों की तैयारियों में जुट गए हैं। चूंकि विद्युत विभाग उनके पास है, इसलिए झांकी मार्ग को जगमगाने में वे कोई कसर छोड़ना नहीं चाहते।
जीतू यादव ने अनंत चतुर्दशी के ऐतिहासिक चल समारोह को लेकर आज नगर निगम के एमआईसी हॉल में अपने प्रभार वाले विद्युत विभाग की महत्वपूर्ण बैठक लेकर समारोह मार्ग पर की जा रही व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। झांकी चल समारोह मार्ग पर विद्युत एवं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विभाग द्वारा व्यापक तैयारियां की गई हैं, जिसमें 5,500 हेलोजन लाइट, 2,000 मेटल लाइट, 17 जनरेटर, 427 सीसीटीवी कैमरे, 3 ड्रोन कैमरों की व्यवस्था की गई है। बैठक में अपर आयुक्त श्री श्रगार श्रीवास्तव जी, सिटी इंजीनियर श्री अश्विन जनवादे जी सहित विद्युत विभाग के सभी इंजीनियर एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
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काफी संघर्ष के बाद मिला पद
कुछ समय पहले पार्षद जीतू यादव की भाजपा में वापसी हुई थी, लेकिन एमआईसी का पद नहीं मिला था। बाद में उनकी एमआईसी में भी वापसी हो गई है। जीतू यादव का कई भाजपा नेताओं ने विरोध किया था, लेकिन विधायक रमेश मेंदोला के आगे किसी की नहीं चली। भोपाल में इंदौर के कुछ नेता और विधायक इस संबंध में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मिले। इन नेताओं ने जीतू के खिलाफ हुई शिकायतों को लेकर प्रदेश अध्यक्ष को अपने तर्क दिए। सच्चाई भी बताई गई। इसके बाद वापसी का फैसला लिया गया।
विधायक मेंदोला ने दिखाई थी ताकत
पार्षद जीतू यादव, विधायक रमेश मेंदोला के खास हैं। उनके प्रयासों से ही जीतू की भाजपा में वापसी हुई थी। इसके बाद मेंदोला लगातार एमआईसी में वापसी के प्रयास कर रहे थे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंची शिकायतों के कारण मामला अटका हुआ था। इस मामले में जीतू यादव का साथ विधायक गोलू शुक्ला ने भी दिया।
पार्षद कालरा और चार नंबर का विरोध फेल
जीतू यादव की वापसी का सबसे ज्यादा विरोध चार नंबर खेमा कर रहा था, लेकिन उनकी नहीं सुनी गई। इसका कारण पिछले दिनों विधानसभा चार के प्रभारी तथा विधायक मालिनी गौड़ के खास वीरेंद्र शेडगे द्वारा संघ कार्यकर्ताओं से मारपीट से उपजा विवाद रहा। संघ कार्यकर्ता की शिकायत पर शेडगे सहित मालिनी गौड़ के कई समर्थकों के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। जीतू यादव की एमआईसी में वापसी के बाद पार्षद कमलेश कालरा राजवाड़ा पर मां अहिल्या की प्रतिम पर सपरिवार धरना देकर बैठ गए थे, जिसे विधायक मालिनी गौड़ ने खत्म कराया।
पिछले कुछ समय से चल रहा था खेला
करीब 18 महीने बाद जीतू यादव का निष्कासन समाप्त हुआ था। जिस दिन यह आदेश आया उसके कुछ ही घंटों पहले महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बड़ा खेला कर दिया। उन्होंने करीब 18 महीने से खाली जीतू यादव के विभाग की जिम्मेदारी निरंजन सिंह गुड्डू को सौंप दी। इसके पीछे महापौर का तर्क था कि काम का नुकसान हो रहा था। यहां बड़ा सवाल यह है कि जब काम का नुकसान हो रहा था, तो यह फैसला पहले क्यों नहीं लिया गया?
कालरा से विवाद के बाद हुआ था निष्कासन
उल्लेखनीय है कि जनवरी 2025 में भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के घर पर कुछ लोगों ने हंगामा किया था। इस दौरान मारपीट भी हुई थी। इस मामले ने भाजपा की राजनीति में हड़कंप मचा दिया था। घटना के बाद जीतू यादव को संदेही मानते हुए पुलिस ने जांच शुरू की थी। भाजपा संगठन ने तुरंत जीतू यादव को पार्टी से बाहर कर दिया था। पुलिस जांच में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के बाद जीतू यादव का नाम पूरक चालान से हटा दिया था। पुलिस ने कोर्ट में पेश किए गए पूरक चालान में स्पष्ट किया है कि घटना के दौरान जीतू यादव की मौजूदगी या उनकी प्रत्यक्ष भूमिका के प्रमाण नहीं मिले हैं। पुलिस की क्लिन चिट के बाद जीतू यादव की पार्टी में वापसी हुई है।



