इंदौर। शहर में अनंत चतुर्दशी पर झांकियों की परंपरा 103 साल पुरानी है। हर साल की तरह इस बार भी झांकियां निकलीं। लोग परिवार सहित इसमें शामिल हुए और किसी तरह की कोई खटपट नहीं हुई। पुलिस थोड़ी सख्त जरूर दिखी, लेकिन इस सख्ती में ही आयोजन की सफलता छुपी है। गुंडे-मवाली, शराबी इस बार जनता से दूर ही रहे।
दरअसल इस बार पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने इसके लिए काफी पहले से ही प्लान बनाने शुरू कर दिए थे। आयोजकों से लेकर जमीनी टीम तक के साथ लगातार मीटिंग कर उन्होंने हर वह खामियां दूर करने की कोशिश की जिससे सुरक्षा-व्यवस्था में परेशानी आ सकती थी। उन्होंने पुलिसिंग का तरीका भी बदला। लाखों की भीड़ के बीच पुलिस की निगाहें जमीन पर तैनात जवानों के साथ आसमान में उड़ते ड्रोन और कैमरों पर भी थीं। सीसीटीवी, फेस-रिकग्निशन कैमरे, वॉच टावर और ड्रोन के जरिए भीड़ तथा संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी गई।
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ड्रोन ने और सुरक्षित किया झांकी मार्ग
इंदौर पुलिस में इसी साल ड्रोन यूनिट भी शुरू हुई है। पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने इस बार झांकी मार्ग पर निगरानी रखने के लिए इसका भरपूर इस्तेमाल किया। इसका फायदा यह हुआ कि कहीं भी कोई गड़बड़ की स्थिति नजर आई तो पुलिस तुरंत ही मौके पर पहुंच गई। इसके लिए अलग से टीम बनाई गई थी, जो पूरी तरह इस पर निगरानी रख रही थी। किसी हिस्से में अचानक भीड़ बढ़ी, किसी रास्ते पर वाहन फंसते या कोई संवेदनशील स्थिति बनती दिखी तो तत्काल पुलिस टीम सक्रिय हो गई।
फेस रिकग्निशन से संदिग्धों पर नजर
झांकी मार्ग पर फेस-रिकग्निशन कैमरों का इस्तेमाल भी इस बार सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा रहा। पुलिस ने इन्हें खास तौर पर भीड़भाड़ और संवेदनशील स्थानों की निगरानी के लिए इस्तेमाल करने की बात कही थी। यह पुलिसिंग के पुराने तरीके से बड़ा बदलाव है। पहले किसी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान के लिए मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी की निगरानी और सूचना तंत्र पर ज्यादा निर्भरता रहती थी। अब कैमरों और डिजिटल तकनीक के जरिए बड़ी भीड़ के बीच भी संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने की कोशिश की जा रही है।
छह संभाग, 12 जोन और 22 सेक्टर
पुलिस ने झांकी मार्ग की सुरक्षा को छह संभाग, 12 जोन और 22 सेक्टर में बांटा था। प्रमुख और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर वॉच टावर बनाए गए। दो हजार से ज्यादा जवान सुरक्षा में लगाए गए थे। इसके अलावा पुलिस कमिश्नर सहित सारे वरिष्ठ अधिकारी मैदान में डटे रहे।
महिलाओं की सुरक्षा में शक्ति दल
झांकी के दौरान सबसे बड़ा तनाव महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर रहता है। इस बार महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष महिला पुलिस टीम ‘शक्ति दल’ तैनात किया गया था। इस दल ने भी पूरी सख्ती के साथ निगरानी रखी, जिससे कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
पूरे मार्ग पर 10 सुरक्षा घर बनाए
पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह के निर्देशनुसार पूरे मार्ग पर 10 सुरक्षा घर बनाए गए थे। इसमें बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए स्पेशल इंतजाम किए गए थे। इससे बुजुर्गों और महिलाओं को काफी मदद मिली। यहां पूरे समय पुलिस की टीम एक्टिव रही।
झांकी मित्रों ने संभाली व्यवस्था
इस बार हर झांकी में झांकी मित्रों को भी तैनात किया गया था, जिससे पुलिस को काफी मदद मिली। ये झांकी मित्र अखाड़ों से समन्वय कर हर व्यवस्था पर निगरानी रख रहे थे। ये झांकी मित्र ही अखाड़ों में सुरक्षा आदि के इंतजाम भी देख रहे थे। इसके अलावा हर झांकी के साथ एक एसआई के साथ चार-पांच जवान तैनात किए गए थे।
ब्रेथ एनालाइजर से होती रही चेकिंग
पुलिस ने इस बार ब्रेथ एनालाइजर का भरपूर इस्तेमाल किया। इसके कारण झांकी में भी शराब पीकर हुड़दंग मचाने वाले शामिल नहीं हो पाए। पुलिस की टीम सिविल ड्रेस में भी घूम रही थी और संदिग्ध लोगों को पहचान कर उन पर कार्रवाई कर रही थी।
मां से बिछड़े बच्चे को तुरंत मिलाया
इस बार इंतजाम ऐसे थे कि बच्चों के बिछड़ने के मामले भी कम हुए। एक बच्चा अपनी मां से बिछड़ गया। सूचना मिलते ही जोन तीन के डीसीपी अभिषेक रंजन ने तुरंत उस बच्चे को ढूंढवाकर मां से मिलाया। पुलिस की सख्ती के कारण इस बार जेबकतरी जैसी अप्रिय घटनाएं भी कम हुईं।



