नई दिल्ली: यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा ने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच काला सागर (Black Sea) की सुरक्षा स्थिति, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही फिर से शुरू करने के तरीकों पर चर्चा हुई।
सिबिहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि उन्होंने जयशंकर को काला सागर की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने दावा किया कि यूक्रेन के खिलाफ रूस की कार्रवाई के बीच उसके बंदरगाहों और समुद्री मार्गों पर हमले बढ़े हैं।
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काला सागर में व्यापार बहाली पर जोर
बातचीत में सबसे अहम मुद्दा काला सागर में सुरक्षित और स्वतंत्र जहाजरानी को दोबारा शुरू करना रहा। दोनों पक्षों ने समुद्री यात्रियों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा की।
यूक्रेन के विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि रूस यूक्रेन के खाद्य निर्यात को बाधित करने की कोशिश कर रहा है। उनके अनुसार, इसका असर केवल यूक्रेन और आसपास के क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक Food Security के लिए भी चुनौती पैदा हो सकती है।
यूक्रेन दुनिया के प्रमुख कृषि निर्यातकों में शामिल है। इसलिए काला सागर के समुद्री मार्गों की सुरक्षा वैश्विक खाद्य आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

भारत ने फिर दोहराया बातचीत और कूटनीति का समर्थन
एस. जयशंकर ने भी बातचीत की पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच Black Sea में व्यापार फिर शुरू करने और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चर्चा हुई।
जयशंकर ने कहा कि भारत सभी समुद्री यात्रियों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयासों का समर्थन करता है। उन्होंने एक बार फिर स्पष्ट किया कि भारत बातचीत और कूटनीति के माध्यम से विवादों के समाधान का समर्थन करता रहेगा।
भारत-यूक्रेन संबंधों पर भी हुई चर्चा
दोनों विदेश मंत्रियों ने भारत और यूक्रेन के बीच द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी बातचीत की। दोनों देशों के आपसी हित वाले मुद्दों को आगे बढ़ाने और भविष्य में संपर्क बनाए रखने पर सहमति बनी।
काला सागर की सुरक्षा को लेकर यह बातचीत ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण समुद्री व्यापार, बंदरगाहों और वैश्विक खाद्य आपूर्ति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
आपकी राय क्या है?
क्या काला सागर में सुरक्षित समुद्री मार्ग और व्यापार फिर से शुरू होना रूस-यूक्रेन तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है? क्या भारत को बातचीत और कूटनीति के जरिए शांति प्रयासों में और सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए?
आपकी राय क्या है? कमेंट में जरूर बताएं।



