मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। इजरायल द्वारा लेबनान में युद्धविराम के बावजूद किए गए भीषण हवाई हमलों के बाद ईरान ने ऐसा कदम उठाया है, जिसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।

ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर समझौते की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को बंद करने का दावा किया है।
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ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि होर्मुज के रास्ते गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है। इस बयान के बाद वैश्विक तेल बाजार, शिपिंग उद्योग और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल तेज हो गई है।
तनाव की शुरुआत तब हुई जब इजरायल ने हिजबुल्ला के साथ हुए युद्धविराम के कुछ ही घंटों बाद लेबनान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू कर दिए। इन हमलों में कई लोगों के मारे जाने की खबर है। ईरान का आरोप है कि युद्धविराम समझौते की पहली शर्त लेबनान में संघर्ष रोकना था, लेकिन इजरायल ने न केवल हमले जारी रखे बल्कि दक्षिणी लेबनान से पीछे हटने से भी इनकार कर दिया।
ईरान के संयुक्त सैन्य कमान खातम अल-अनबिया मुख्यालय ने घोषणा की कि जब तक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रतिबंध लागू रहेगा। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि इजरायली हमले नहीं रुके तो और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

हालांकि अमेरिका ने ईरान के इस दावे को खारिज कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला है और जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, शनिवार को इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से दर्जनों व्यापारिक जहाज सुरक्षित रूप से गुजरे और करोड़ों बैरल तेल की सप्लाई भी जारी रही।
इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित परमाणु वार्ता पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। स्विट्जरलैंड में होने वाली तकनीकी वार्ता को लेकर दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडल पहुंच चुके हैं, लेकिन बढ़ते तनाव के कारण बातचीत की सफलता पर सवाल उठने लगे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति और बिगड़ती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह केवल कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है या मध्य पूर्व एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की ओर बढ़ रहा है? क्या अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता टकराव दुनिया को नए संकट में धकेल सकता है?
आपकी क्या राय है? क्या ईरान का यह कदम उचित है या इससे वैश्विक तनाव और बढ़ेगा? क्या मध्य पूर्व में हालात बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं? कमेंट कर अपनी राय जरूर बताएं।



