अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। शिवसेना (यूबीटी) की वरिष्ठ नेता Priyanka Chaturvedi ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “इससे बड़ा पाप नहीं हो सकता कि श्रद्धालुओं के पैसे भी चुरा लिए जाएं। जो भक्त राम मंदिर में आस्था के साथ चढ़ावा चढ़ाते हैं, अगर वही धन गलत तरीके से इस्तेमाल हुआ है तो यह बेहद गंभीर मामला है।”
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उन्होंने आगे आरोप लगाया कि भाजपा राम मंदिर निर्माण का श्रेय लेती है, लेकिन अब सामने आ रही जानकारियां बड़े घोटाले की ओर इशारा कर रही हैं। उनके मुताबिक, एसआईटी जांच में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा केवल वोट की राजनीति करती है और उसकी न तो धर्म में आस्था है और न ही भक्ति में विश्वास।

विवाद बढ़ने के बाद Uttar Pradesh सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस टीम में आईएएस अधिकारी विजय विश्वास पंत, आईपीएस अधिकारी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है। जांच दल अयोध्या पहुंच चुका है और जांच पूरी होने के बाद अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा।
इस बीच विपक्षी दलों ने एसआईटी की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मामले की जांच किसी पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की निगरानी में कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके।
अब सभी की नजरें एसआईटी जांच पर टिकी हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला देश के सबसे चर्चित धार्मिक स्थलों में से एक से जुड़ा बड़ा विवाद बन सकता है, वहीं अगर आरोप गलत साबित होते हैं तो राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर भी सवाल खड़े होंगे।
सबसे बड़ा सवाल यह है—क्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद में वास्तव में कोई वित्तीय गड़बड़ी हुई है, या फिर यह सिर्फ एक राजनीतिक आरोप है? क्या SIT जांच से पूरा सच सामने आएगा?
आपकी क्या राय है? क्या इस मामले की जांच SIT से होनी चाहिए या किसी पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में? कमेंट करके अपनी राय जरूर बताएं।



