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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट और चीफ जस्टिस पर विवादित टिप्पणी करने वाले भाजपा सांसद निशिकांत दुबे पर अब अवमानना की कार्रवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट के वकील अनस तनवीर ने दुबे के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए अटॉर्नी जनरल की सहमति मांगी है।
अदालत की अवमानना की कार्यवाही के लिए अटॉर्नी जनरल की पूर्व सहमति जरूरी होती है। अगर अटॉर्नी जनरल की सहमति मिलती है तो आने वाले दिनों में ये तय है कि बीजेपी सांसद की मुश्किलें बढ़ सकती हैं अधिवक्ता अनस तनवीर की तरफ से न्यायालय की अवमानना अधिनियम की धारा 15(बी) के तहत पत्र लिखा है। वकील अनस ने कहा कि निशिकांत का बयान बेहद अपमानजनक और खतरनाक रूप से भड़काऊ हैं। अनस सुप्रीम कोर्ट में बिहार से कांग्रेस सांसद मो. जावेद की ओर से वक्फ संशोधन अधिनियम पर पक्ष रख रहे हैं।
पत्र में बताया गया है कि दुबे ने सुप्रीम कोर्ट पर संसद के काम में अतिक्रमण का आरोप लगाया है। वह सुप्रीम कोर्ट पर अराजकता फैलाने का भी आरोप लगा रहे हैं। वकील ने लिखा है कि संविधान में सुप्रीम कोर्ट को दायित्व दिया गया है कि वह किसी कानून की संवैधानिकता की जांच करे। निशिकांत दुबे बातों को गलत तरीके रख कर सुप्रीम कोर्ट को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। चिट्ठी में यह भी कहा क्या है कि दुबे ने चीफ जस्टिस संजीव खन्ना का नाम लेकर उन्हें देश में सिविल वार के लिए जिम्मेदार भी बताया है। इस तरह के सभी वक्तव्य कंटेंप्ट आफ कोर्ट एक्ट की धारा 2(c)(i) के तहत सुप्रीम कोर्ट की अवमानना हैं।



