भाजपा की नगर कार्यकारिणी पर भोपाल में मथन, अधिकांश नाम लगभग तय, कभी भी हो सकती है घोषणा, देखें संभावित सूची…

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इंदौर। भाजपा की इंदौर नगर कार्यकारिणी की अंतिम सूची पर मंगलवार को मंथन हुआ। अधिकांश नाम लगभग तय हो चुके हैं और कभी भी इसकी घोषणा हो सकती है। सुमित मिश्रा को 30 जनवरी 2025 को नगर अध्यक्ष बनाया गया था, तब से कार्यकारिणी की कवायद चल रही थी। सबसे ज्यादा मारामारी महामंत्री पद को लेकर थी, लेकिन सुमित मिश्रा ने सामंजस्य बिठाते हुए सबको संतुष्ट करने की कोशिश की है।

महामंत्री के एक पद पर विधानसभा दो के विधायक रमेश मेंदोला का कब्जा रहा। वे अपने समर्थक सुधीर कोले को यह पद दिलाने में सफल रहे। वहीं, महामंत्री के दूसरे पद पर मालिनी गौड़ अपने समर्थक महेश कुकरेजा को बिठाने में सफल रही हैं। चार नंबर से लंबे समय से कोई महामंत्री नहीं बना था। सिंधी समाज को प्रतिनिधित्व देकर मालिनी गौड़ और सुमित मिश्रा ने अच्छा समीकरण साधा है।

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उपाध्यक्ष पद देकर साधा समीकरण

सुमित मिश्रा ने महामंत्री के पद पर अड़े नेताओं के समर्थकों को उपाध्यक्ष पद देकर सामंजस्य बिठाने की कोशिश की है। इसमें मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के समर्थक भूपेंद्र केसरी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव के समर्थक भरत पारीक, विधायक मधु वर्मा के समर्थक गौतम शर्मा और विधायक गोलू शुक्ला के खास दीपेंद्र सोलंकी को स्थान मिला है। इससे साफ जाहिर है कि सुमित मिश्रा ने सारे वरिष्ठों को भी संतुष्ट करने की कोशिश की है।

ये रहे कार्यकारिणी के संभावित नाम

महामंत्री-

सुधीर कोले, महेश कुकरेजा और एक नाम तय होना बाकी।

उपाध्यक्ष-

हरप्रीत सूदन, गौतम शर्मा, भूपेंद्र केसरी, वासुदेव पाटीदार, भरत पारेख, दीपेंद्र सोलंकी (कुछ नाम बाकी)

मंत्री-

नारायण पालीवाल, नेहा शर्मा, नीलेश चौधरी, इंदू श्रीवास्तव

मीडिया प्रभारी– वरुण पाल

कार्यालय मंत्री– विशाल यादव

विवाद के बाद दूसरी बार हुई थी रायशुमारी

इंदौर में नगर कार्यकारिणी के लिए दो बार विधायकों, सांसद, महापौर तथा वरिष्ठ नेताओं के साथ पर्यवेक्षकों ने रायशुमारी की थी। पर्यवेक्षक विवेक जोशी और आशुतोष तिवारी की उपस्थिति में यह प्रक्रिया दोबारा हुई, क्योंकि इससे पहले भी सारे विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने दोनों पर्यवेक्षकों को अपने समर्थकों के नाम सौंपे थे, लेकिन तब नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा उस दौरान उपस्थित थे। इसको लेकर सवाल उठाए गए और भोपाल में कई विधायकों ने इस पर आपत्ति उठाई थी। विधायकों का कहना था कि सुमित मिश्रा की उपस्थिति के कारण वे अपनी बात ठीक से नहीं कह पाए थे। इसके बाद संगठन ने दोबारा यह प्रक्रिया पूरी करने का फैसला लिया था।

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