अपने ही क्षेत्र के, अपने ही समाज के, अपनी ही पार्टी के पीड़ित पार्षद के पास 9 दिन बाद पहुंचे सांसद, आखिर किस बात का डर था, क्या सांसदी जा रही थी?

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इंदौर। मध्यप्रदेश ही नहीं पूरे देश में भाजपा के पार्षद कमलेश कालरा के घर भाजपा के ही महापौर परिषद के पूर्व सदस्य के गुंडों द्वारा हमले की खबर चर्चा में है। इसके ऑडियो-वीडियो को सबने देखा। जिसने देखा उसके दिमाग में एक ही बात आई कि जब भाजपा के एक पार्षद के साथ ऐसा हो सकता है तो आम आदमी की औकात क्या है? 5-6 दिन तक बिल्कुल शांति रही। मामला सिंधी समाज का था तो उम्मीद की जा रही थी कि देश में सर्वाधिक वोटों से जीतने वाले देश के एकमात्र सिंधी सांसद इस पर संज्ञान लेंगे, लेकिन वे मुंह छुपाए बैठे रहे। वे अपने ही समाज और अपनी ही पार्टी के सांसद की डरी हुई मां और डरे हुए बेटे के साथ भी खड़े होने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।

सिंधी समाज ने इस घटना के विरोध मे बैठक बुला ली। उसमें भी नहीं गए। बताया गया कि वे बाहर हैं, लेकिन अपने लोगों यानी कंचन गिडवानी और विशाल गिडवानी को तो भेज ही सकते थे। वे भी नहीं गए। सांसद महोदय के भाई प्रकाश लालवानी गए भी तो पीड़ित पार्षद और समाज का साथ देने की बजाए यह कहने लगे कि भाई 12 लाख वोट से जीता है। पूरे इंदौर का सांसद है। सिंधी समाज का नहीं। खैर, लोगों ने यहां तक सह लिया, लेकिन सिंधी समाज के नाम पर लोकसभा का टिकट लाकर सर्वाधिक वोटों से जीतने वाले सांसद से इंदौर की जनता यह तो उम्मीद कर ही सकती है कि वह इस तरह की घटना में बिना डरे अपना मुंह तो खोले। लेकिन, ऐसा हुआ नहीं।

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सीएम के ट्वीट के बाद आई प्रतिक्रिया

विडंबना यह कि सांसद महोदय ने इस घटना की निंदा तक करना उचित नहीं समझा। शायद उन्हें ऐसा लग रहा था कि अगर उन्होंने कुछ बोला तो जीतू यादव के साथ ही दो नंबर के बहुत सारे गुंडे उनके घर हमला कर देंगे। सांसद महोदय, उनके समर्थक पार्षद और दो-चार कार्यकर्ता जो उनके आसपास घूमते रहकर पूरे शहर का ठेका उठाते हैं, वे भी चुप रहे। पूरे शहर ने इस घटना की निंदा की, लेकिन सांसद महोदय को यह घटना तब निंदनीय लगी, जब सीएम डॉ.मोहन यादव ने इसकी निंदा कर दी। और हद तो तब हो गई कि जब पीड़ित पार्षद के घर पहुंचने में सांसद महोदय को 9 दिन लग गए।

इस हमाम में सब नंगे ही दिखे

अपने दम पर इंदौर के महापौर का चुनाव जीतने वाले हाईकोर्ट के पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता और वर्तमान महापौर पुष्यमित्र भार्गव की भूमिका की चर्चा भी शहर में है। सारे कानूनी पहलू जानने वाले भार्गव साहब को भी सीएम के ट्वीट का इंतजार था। वे भी सीएम के ट्वीट के बाद अपने ही पार्षद के घर मिलने पहुंचे। अरे, शहर को कानून के इतने बड़े जानकार से तो सबसे पहले पहुंचने की उम्मीद थी।

मालिनी और एकलव्य ने दिखाई हिम्मत

इस मामले में विधानसभा 4 की विधायक मालिनी गौड़ और उनके बेटे एकलव्य सिंह गौड़ की हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी। वे घटना के बाद से ही भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के साथ खड़े दिखी, बल्कि सीएम से मिलवाकर इस घटना की जानकारी तुरंत पहुंचाने में भी बड़ी भूमिका निभाई। इसी का परिणाम रहा कि आज जीतू यादव आज सड़क पर है।

अगर ऐसे ही चलता रहा तो इंदौर का क्यो होगा?

इस घटना के बाद से शहर के लोग इस चिन्ता में हैं कि अगर ऐसे ही चलता रहा तो देवी अहिल्या की इस नगरी का क्या होगा? सत्तारूढ़ दल के एक पार्षद के घर में घुसकर कुछ गुंडे उसकी मां से बदतमीजी करें, उसके बेटे को नंगा कर उसका वीडियो वायरल करें और वहां का सांसद चुप बैठा रहे। सांसद महोदय, कम से कम ऐसी घटना जो कि पूरे शहर की नजर में गलत है, उसमें तो बिना राजनीतिक नफा नुकसान देखे खड़े रहो। इससे न तो आपके वोट घटने वाले थे और न ही आपकी सांसदी छीनी जाने वाली थी। शहर शर्म कर रहा है, आप भी शर्म कर सकते हो।

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