जब से श्याम टेलर भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बने हैं, तब से इंदौर अध्यक्ष को लेकर घमासान जारी है। युवाओं के संगठन के इस पद के लिए दावेदार ऐसे लगे हैं, जैसे लोकसभा और विधानसभा के लिए टिकट मांग रहे हों। अधिकांश दावेदार धन्नापति हैं, जिससे आम कार्यकर्ता खुद को असहाय महसूस कर रहा है।
कुछ समय पहले संगठन ने इंदौर अध्यक्ष पद के लिए जो नाम पहुंचाए थे, उनमें अधिकांश वही नाम थे जो पैसे के बल पर पद पाने के इच्छुक थे। संगठन ने भी एक भी आम कार्यकर्ता का नाम नहीं भेजा था। इस सूची पर इतना विवाद मचा कि वह रद्द हो गई और फिर से सूची तैयार की जाने लगी। इस सूची में भी ऐसे नामों की चर्चा ज्यादा थी जो पार्टी के आयोजनों पर जमकर पैसा लुटा रहे थे।
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ताज्जुब तो इस बात का है कि धन्नापतियों की करतूत से प्रदेश संगठन भी अनभिज्ञ नहीं है। जब प्रदेश कार्यकारिणी का गठन हो रहा था तो भोपाल तक बात पहुंची थी, जिसके कारण कई धन्नातियों को स्थान नहीं मिला। इसके बाद भी धन्नापति दावेदारों ने हार नहीं मानी और अपनी सक्रियता जारी रखी।
ऐसे ही दावेदारों ने रविवार को प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर के स्वागत में होर्डिंगों पर इतना पैसा बहाया कि पूरा इंदौर चकित रह गया। लोग यह कह रहे थे कि आखिर भाजयुमो अध्यक्ष पद में ऐसा क्या है, जो दावेदार पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं।
नगर अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर सारे विधायक से लेकर भाजपा के अन्य नेता तक अपने समर्थकों के लिए पैरवी कर रहे हैं। लोग संघ से लेकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन तक पहुंच चुके हैं। एक धन्नापति दावेदार तो इंदौर के एक ऐसे नेता की शरण में पहुंच गए हैं, जो राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के खास माने जा रहे हैं। आश्चर्य तो इस बात का भी है कि जब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष तक इन धन्नापतियों की बात पहुंच चुकी है तो आखिर इन्हें प्रश्रय देने की हिम्मत कौन कर रहा?
ऐसे में आम कार्यकर्ता कह रहे हैं कि वे सालों से पसीना बहा रहे हैं, नेताओं के आयोजनों में भीड़ जुटाने से लेकर उनके झंडे-बैनर लेकर घूम रहे हैं फिर उनकी चिन्ता कोई क्यों नहीं पाल रहा।
क्या एक बार फिर आम कार्यकर्ता सिर्फ दरी ही बिछाता रह जाएगा।
क्या हर कार्यकर्ता को मौका देने की बात कहने वाली भाजपा के बड़े नेताओं को एक बार फिर आम कार्यकर्ताओं का चेहरा दिखाई नहीं दे रहा….



