रीजनल पार्क का टेंडर बचाने निकले पिंटू सेठ, इंदौर के कई अधिकारियों ने किया किनारा, अब भोपाल में ‘ब्रह्मास्त्र’ चलाने की तैयारी

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इंदौर। रीजनल पार्क के टेंडर को लेकर मचे बवाल के बाद अब पिंटू सेठ यानी गुरजीत सिंह छाबड़ा उर्फ पिंटू छाबड़ा अब अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। बताया जाता है कि उनके मॉल, होटल और मल्टीप्लेक्स में अब तक परिवार सहित मुफ्त आनंद लेने वाले अधिकारियों ने भी किनारा कर लिया है। अब उनकी उम्मीद भोपाल पर टिकी हुई है। अब वे भोपाल में ‘ब्रह्मास्त्र’ चलाने की तैयारी में हैं।

उल्लेखनीय है कि इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा 55 करोड़ रुपए खर्च कर अरबों रुपए की जमीन पर बनाए गए रीजनल पार्क को मात्र 2 करोड़ 26 लाख रुपए सालाना में पिंटू सेठ की कंपनी को ठेके पर देने की तैयारी है। वर्तमान में इस बदहाल पार्क से भी नगर निगम को 70 लाख रुपए सालाना की कमाई हो रही है। ऐसे में 2 करोड़ 26 लाख में 27 साल के लिए पिंटू सेठ जैसे ख्यात जमीन के सौदागर के हाथ इसे सौंपने पर कई सवाल उठ रहे हैं।

लंबे समय से कब्जे की कोशिश में पिंटू सेठ

पिंटू सेठ अरबों रुपए की इस सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जे की कोशिश में लंबे समय से लगे हैं। इसीलिए नगर निगम ने जब भी इसका टेंडर निकाला पिंटू सेठ भी इसमें शामिल हुए, लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही थी। एक बार तो टेंडर मंजूर होते-होते रह गया। वर्तमान टेंडर में भी पिंटू सेठ ने सबसे ज्यादा रेट भरा है और इसमें टेंडर प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत की बात भी कही जा रही है, क्योंकि इस टेंडर में आठ बार करेक्शन किए गए हैं। इसमें दर का बढ़ाना भी शामिल है।

अब भी कान्फिडेंस में फर्जीवाड़े के शंहशाह

इस टेंडर पर शहर के नेता और लोग सवाल इसलिए उठा रहे हैं कि जिन लोगों को यह पार्क सौंपा जा रहा है, वह इंदौर के नामी जमीन के जादूगर हैं। पिंटू सेठ का तो कहना ही क्या। लाख विरोध के बाद भी सरकारी विभागों की मिलीभगत से पिंटू सेठ ने एबी रोड पर चाय व्यापारियों के छोटे-छोटे प्लॉटों को जोड़कर दो बड़े मॉल खड़े कर लिए। इसके बाद एक सहकारी संस्था की विवादित जमीन पर सी 21 बिजनेस पार्क खड़ा कर लिया। एबी रोड से लेकर बायपास तक पिंटू सेठ का कब्जा है। इसीलिए उनका कान्फिडेंस हाई है कि वे एक बार फिर फर्जीवाड़े में सफल हो जाएंगे।

पिंटू सेठ के इशारे पर चलते हैं कई विभाग

बताया जाता है कि बिहार से आकर इंदौर में जमीनों के सबसे बड़े जादूगर बने पिंटू सेठ के दबदबे का आलम यह है कि कई विभाग तो सिर्फ उनके इशारे पर ही चलते हैं। इंदौर विकास प्राधिकरण, नगर निगम, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग, सहकारिता से लेकर कई विभागों में पिंटू सेठ की धमक है। कई विभागों के अधिकारी तो उनके मॉल में खरीदारी कर और परिवार को पिक्चर दिखा कर ही खुश हो जाते हैं। बाकी सेठ के पास लक्ष्मी रूपी ‘ब्रह्मास्त्र’ तो है ही। तभी तो वे हर विभाग से फर्जी एनओसी भी ले आते हैं और शहर की मुख्य सड़कों पर सबकी आंखों के सामने बड़ी-बड़ी इमारतें खड़ी कर लेते हैं।

हंगामा मचा तो अधिकारी कर रहे किनारा

पिंटू सेठ को मुगालता है कि उनके हर फर्जीवाड़े में सारे विभागों के अधिकारी साथ देंगे। सब उनके गुलाम जो हैं। इसी मुगालते में वे रीजनल पार्क का टेंडर बचाने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि कई अधिकारियों ने उनसे मिलने तक से इनकार कर दिया। कई ने यह कह दिया कि वे घर पर नहीं मिलते। कई ने कहा कि रविवार होने के कारण वे शहर से बाहर हैं। इनमें से कुछ अधिकारी वे भी हैं, जिन्हें पिंटू सेठ अपने मॉल, होटल आदि में अक्सर मुफ्त सर्विस देते रहते हैं।

एक वरिष्ठ अधिकारी से अब भी आस

पिंटू सेठ को अपने पीआर एक्सरसाइज पर बहुत भरोसा है। इसीलिए वे भोपाल के चक्कर लगा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि अब उनकी अंतिम आस नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी हैं। बताया जाता है कि जब वे इंदौर में पदस्थ थे, तो पिंटू सेठ ने उन्हें अपने शीशे में उतारा था। जाओ पिंटू सेठ, अब भोपाल में भी अपना जौहर दिखा दो। हो सकता है हर बार कि तरह इस बार भी आपका ब्रह्मास्त्र चल जाए।

महापौर को मामला ठंडा होने का इंतजार

पिंटू सेठ के टेंडर की फाइल महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने फिलहाल अपने पास दबा रखी है। भाजपा के नेताओं को भी ताज्जुब है कि आखिर भार्गव जैसा समझदार और ईमानदार नेता पिंटू सेठ की चाल में कैसे आ गया। कहा जा रहा है कि महापौर चाहते हैं कि टेंडर को लेकर मच रहा हो-हल्ला जरा शांत हो जाए तो इस फाइल को आगे बढ़ाएं।

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